लड़किया मौन होकर सब सह जाती है

मेरे साथ आज की एक घटित घटना ने यह पोस्ट लिखने पर विवश किया है-:

आज मैं लखनऊ में निशातगंज से चिनहट के लिये एक विक्रम(10 सीटर) टैम्पों में यात्रा कर रहा थां।यूं तो निशातगंज से चिनहट का सफर में लगभग आधे घंटे लग जाते है।

टैंपो दो बुद्धिजीवी टाईप के लगभग 55 और 60 वर्षीय बुजुर्ग सरकार की नितियों व देश के वास्तविक हालात पर चर्चा कर रहे थे आमने सामने बैठकर।एक पान खाया अपने आप को युवा बताने की कोशिश करता बुजुर्ग और उसकी बगल मे बैठी एक लगभग एक 17 या 18 वर्ष की एक लड़की बैठी थी।बातों ही बातों में बुढ्ढा लगातार कहता कि कि तू तो मेरी बेटी है प्यारी वाली बेटी इत्यादि कहकर चेहरे को बार बार छूता ये सब मैं बड़े ध्यान से देखता रहा लड़की कयी बार असहज महसूस कर रही थी उसके चेहरे का रंग उड़ा उड़ा सा था।मैं उस लड़की की भावना को पढ़ने का प्रयास करता रहता जब भी वह बुढ्ढा यह हरकते करता।अंतत: मेरी भावना का सब्र टूट गया मैने बुढ्ढे से कहा अंकल यह प्रेम घर के अंदर प्रदर्शित करिये सार्वाजनिक स्थलों पर शोभा नही देता।उस बुढ्डे ने माहौल को समझते हुवे अपने चेहरे खामोशी की चादर ओढ़े अंतत: वह बुढ्ढा लेखराज मार्ग पर उतर जाता है।

मैं तब तक सब कुछ समझ चुका था माहौल को पढ़ चुका था।सामने वाली लड़की सहमी सी अपने मोबाईल पर व्यस्त होकर खौफ को दूर करने का विफल प्रयास कर रही थी।लेकिन मेरी अंतरात्मा बार बार प्रश्न करती कि मैं उस लड़की से बात करूं और पूछू कि वह बुढ्ढा आखिर कौन था।और अंतत: पालिटेक्निक चौराहे तक पहुचते पहुंचते मैने उस लड़की से पूछ ही लिया कि

क्या वो आपके पापा या अंकल या कोई रिश्तेदार थे लड़की असहज सी होकर चुप्पी साधे रही मैने यही प्रश्न फिर किया और अंतत: नम आंखो से उसने कहा कि ……मैं उसको जानती तक नही थी।फिर मैने पुछा…..कि आप ने फिर उसकी हरकतों पर बोला क्यों नही हम सब निपट लेते।उसने जवाब दिया……कि मैं बेवजह बवाल नही खड़ा करना चाहती फिर चिनहट आते आते वह उतर गयी।

मैं कुछ देर खड़ा सारी बातो पर गहराई से सोचता रहां उस लड़की की भावना को गहराई से विवेचना करता रहा मै निशब्द था।

सीधा सा मतलब था कि ऐसेे मनचले बुजुर्ग अपनी उम्र का फायदा उठाते है कमजोर और कम उम्र की लड़कियों को छेड़ देते है लड़किया इस हरकत पर आवाज इसलिये नही उठाती कि समाज कहेगा कि क्या बुजुर्ग होकर ऐसी हरकत कर भी सकते है क्या भला।इन सब बातो का फायदा उठाकर यही यौन हिंसा खुलेआम करते है डरी सहमी लड़किया मौन होकर सब सह जाती है।

मैं उन सभी लड़कियों से निवेदन करता हूं ऐसी गंदी हरकतों को बर्दाश्त ना करे अपने आस पास के लोगो को बताये।आपकी खामोशी ही आगे कयी लड़कियों को ये सब सहने के लिये मजबूर करती है ध्यान रहे।

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