ट्रेन यात्रा

उसमे भी भारतीय रेल की लंबी दूरी की यात्रा..!!मैने विदेशों मे भी ट्रेन यात्रा की है..सबकुछ करीने से..सिस्टमैटिक..!!
बोले तो डिसिप्लीन्ड..!! साफ सुथरी ट्रेन, साफ सुथरे लोग साफ सुथरे बौरिया-बिस्तर..!!

हमारी ट्रेने लाख दौषपूर्ण हो.. लेकिन जो जीवन का सार भारतीय रेल यात्रा सिखाती है वो दुनिया मे आपको कहीं नसीब ना होगी..!!

खैर..

एक बात आपने यात्रा मे नोट की या नहीं.. लेकिन मेरी बेटी ने की..!!

बोली..पापा..ट्रेनो मे अक्सर जो लोग धार्मिक किताबें पढ़ते दिखाई देतें हैं..उनमे से हिंदु एक भी नहीं होता…!!

या तो मुस्लिम होता है या क्रिश्चन..या फिर कोई और …!!

ऐसा क्यों..??

इस अप्रत्यासित प्रश्न के लिये..मै कत्तई तैयार नहीं था..!!

जवाब क्या देता..!!

कुछ समय तक मै चुप हो गया..!! लगभग दस मिनट के बाद कुछ ऐसा जवाब सूझा..!!

सनातन धर्म जीवन पद्धति है..जरूरी नहीं कि कोई किताब पढ़ कर इसमें पूरक हुआ जाये..!! विश्व का ये एक-मात्र धर्म है जो आपको धार्मिक ग्रंथ पढ़ने पर मजबूर नहीं करता..जबकी सनातन मे धर्म के जितने ग्रंथ और पुस्तकें है वो किसी और धर्म मे नहीं..!!

यही मात्र एक धर्म है जो आपको कभी धार्मिक स्थल पर जाने को मजबूर नहीं करता..आप की मर्जी जाओ या मत जाओ..!!
अपने ईश्वर को मन रूपी मंदिर मे स्थापित कर स्मरण कर लो..!!

ये धर्म आपको..एक पैर पर उकड़ु बैठ कर ..कमर को फ्रिक्वेंटली हिलाते हुए पुस्तक रटने को नहीं कहता..!!

ये धर्म जबरदस्ती किसी को फादर कहने को मजबूर नहीं करता..!!

यही धर्म किसी नास्तिक को बुरा नहीं कहता..!!

जिस धर्म का उदय नहीं, उसका अवसान भी नहीं है, सनातन तो अनादि काल से चला आ रहा है..!!

सनातन का तो एक ही मूलमंत्र है..

“धर्म की जय हो, अधर्म का नाश हो,
प्राणियों मे सद्भावना, विश्व का कल्याण हो..!!”

Writer- Pawan Acharya

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