वर्षा ऋतु के आगमन पर एक मेरी छोटी सी रचना

देखो काली घटा छाई है
खुशी की सौगात लाई है

फूल कलीयां भी मुस्कुराई है
धरती की अग्न को मिटाई है

इंद्रधनुषी रगं की छटा को देखो
काली छायी घोर घटा को देखो

बादल कर रहे है सिंह गर्जना
मोर बनी है वन में नृत्यांगना

वर्षा ऋतु देखो कितनी सुहानी है
इसलिये तो ये ऋतुओं की रानी है

देखो चहुओर छायी है हरीयाली
अन्नदाता के घर आयी खुशहाली!!

मनीष की  कलम से..!!

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