जिंदगी के सबक

#जिंदगी_के_सबक

शिर्षक से मुद्दतों बाद #मनीष की एक छोटी सी रचना-:

खुशनुमा दौर था जिंदगी का
आई कुछ दौर ए मुश्किलें तो
फिर सब कुछ हिला सा दिया,,

सब्र का एक सागर था अंदर मेरे
हौसलों के ज्वार ने टूंटते उम्मीदों
को मेरे फिर से तैरना सिखा दिया,,

और जब टूटते हौसले संभाल रहा
था मैं तो फिर जमाने के अपनों ने
गिराने के लिये जाल बिछा दिया,,

उठता गया मैं गिरता गया मैं फिर
साजिशों की सिढियों पर चलते हुवे
सफलताओं का किर्तिमान बना दिया,,

एहसान मंद हूं उनका मै जिन्होंने
बदनाम करते करते मुझे एक गुमनाम
को दुनिया मे एक पहचान बना दिया,,

गुजरते रहे बुरे दौर मेरे जिंदगी के फिर
अरमानों को सहेजते हुवें हमने दुनिया
में अपना एक नया मुकाम बना दिया,,

शुक्रगुजार हूं ए जिंगदी और तेरी क्यों
कि तेरे दिये सबक ने मेरी खुद से खुद
की दुनिया में पहचान करा दिया,,

मनीष की कलम से👍

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