साइड मिरर लगा ले बेटा…. पिछे देखने में आसानी रहेगी

आज मेरे साथ जो बेहद दुखद दुर्घटना हुई उसे मैं आप सबसे शेयर करना चाहता हूँ ताकि आप या आपके घर के मेरी उम्र के लड़के इसका शिकार ना हों। महीलायें भी ध्यान दें ताकि उनके घर के मर्दों/लड़कों को इस दुखद हादसे का शिकार ना होना पड़े।

मैंने मेरी गाड़ी के साइड मिरर निकाल रखे हैं, यूँ तो मैं वैसे भी स्वयं काफी लापरवाह किस्म का हूँ। पिताजी ने ना जाने कितने ही बार कहा है “काँच लगाले बेटा, पिछे देखने में आसानी होगी कोई गाड़ी आती रहे तो, मुड़ कर देखना नहीं पड़ेगा।” माँ ने भी कई बार कहा कि पापा की बात सुनता क्यूँ नहीं। लेकिन हम तो ठहरे हम। निकाल कर रख दिये शीशे को।

आज हुआ यूँ कि मैं नागपूर के बाहरी इलाके कलमना से घर के लिये रात नौ बजे के करीब आ रहा था, रास्ते में अंधेरा था, खैर आगे बढते हुये आया तो रेलवे फाटक बंद था। मैं वहाँ जाकर रूका तो मेरे अगल बगल और भी गाड़ीयाँ आ कर रूक गयी, पिछे भी कुछ गाड़ीयाँ आ गयी।

अब ट्रेन आने को समय था मैं अगल बगल देखने लगा, तभी देखा मेरे बगल का लड़का बार बार पिछे देख रहा था, मुझे लगा यह इतनी बार क्यूँ पलट रहा है?? मैंने भी मुड़ कर देखा तो देखता ही रह गया… पिछे एक बहुत ही खूबसूरत लड़की स्कूटी पर बैठी थी और उसके पिछे बैठा था उसका बॉडीबिल्डर भाई (या फिर बॉयफ्रेंड)। अब मुड़ मुड़ कर देखना तो खतरे से खाली नहीं था, पर इतनी खूबसूरत को ना देखने का पाप करना भी काफी दुखद था।

ऐसा नहीं था कि मैं उसके बॉयफ्रेंड की बॉडी से डर गया, दरअसल बात यह है कि मैं जानता हूँ बॉडी बनाने में कितनी मेहनत लगती है। उस बेचारे ने गर इतनी मेहनत से बॉडी बनायी है तो मुझे क्या उसकी मेहनत का सम्मान नहीं करना चाहीये?? बल्कि मैं तो परिश्रम को ही इश्वर मानने वाला व्यक्ति हूँ, इसलिये मैंने उसके मेहनत का सम्मान करते हुये पिछे मुड़कर दोबारा नहीं देखा।

पर उस खूबसूरत नारी को मुड़कर ना देख आने के पाप से होती मन में ग्लानि को मिटाने के लिये मैं तड़प गया था, उपर से सर्दी भी थी। मैं पश्चाताप में था कि मैंने अगर आज साइड मिरर ना निकाले होते तो इस तरह एक नारी सौंदर्य का अपमान ना हो रहा होता। खैर ट्रेन आकर चली गयी,फाटक उपर हुआ मैंने गाड़ी आगे बढा दी। अब मैं उसकी गाड़ी मेरे बगल में आने का इंतेजार कर रहा था कि ताकि मैंने जो अभी पाप किया है उसका प्रायश्चित कर सकूँ। लेकिन वह बगल में आ ही नहीं रही थी, तभी मैंने मुड़कर देखा कि वह तो मेन रोड के बीच से निकली एक गली में मूड़ पलट कर चली जा रही है।

अत: इस अपराधबोध से ग्रस्त मन और इस हादसे के दुख में डुबे हृदय को लेकर मैं आगे बढ गया। पर रास्ते में पिताजी के शब्द बार बार कानों में गूँज रहे थे …” साइड मिरर लगा ले बेटा…. पिछे देखने में आसानी रहेगी..”

अत: गाड़ी में साइड मिरर जरूर लगायें और हमेशा माता पिता की बात मानें। क्यूँ कि हादसे बताकर नहीं आते। हमेशा तैयार रहें।

धन्यवाद।

Reference – Abhinav Pandey

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