इसलिये मीटिंग गुप्त रखी गई

‘जिन लाहौर नी वेख्या , समझो ओ जन्मीया ही नी’

ये कहावत तो सुनी ही होगी . लाहौर का नाम सुनकर पारा मत चढाइये , ये कहावत पाकिस्तान बनने के दशकों पहले की है. लाहौर का पौराणिक महत्व भी है .आजादी के पहले लाहौर दिल्ली के साथ दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक केंद्र था . फिल्म उद्योग मुम्बई से पहले यही था. लाहौर आज भी अपने खाने, बाज़ार और रौनक के लिये जाना जाता है . खाने के मामले में दिल्ली , अमृतसर को टक्कर सिर्फ लाहौर ही दे सकता है .

यहाँ का अनारकली बाजार .. चाँदनी चौक की तरह ही लाहौर की पहचान है . देर रात तक खुलने वाली दुकानें , वेज , नॉनवेज खाना लाहौर को पाकिस्तान के सारे शहरों से अलग करती है .. इसका सबसे बड़ा कारण ये पंजाबियों का शहर जो है . भारत से सबसे ज्यादा नफरत भी पाकिस्तानी पंजाबी ही करते है . अनारकली बाजार का अनारकली सूट से कोई लेना देना नही है लेकिन यहाँ और कराची में मिलने वाले लेडीज सूट की अपनी रेंज , क्वालिटी और डिजाइन की वजह से पूरे एशिया में डिमांड है .

आज के दौर में ज्यादा पैसा कमाना कौन नही चाहता ? जितना हो कम पड़ता है , हर कोई चार पैसे ज्यादा कमाने की जुगाड़ में लगा होता है . मेहमूद कसूरी पाकिस्तान के विदेश मंत्री , राजदूत रह चुके है , विदेश विभाग में भी कई साल सेवा कर चुके है . अच्छा खासा कमाया होगा फिर भी आजकल किताबें लिखकर पैसा बना रहे है . इसके अलावा ये एक काम और करते है . इन्हें जब भी भारत आना होता है ..ये अनारकली बाजार से 40-50 सूट लेकर आते है और यहाँ आकर बेच देते है . आने जाने का खर्चा भी निकल जाता है और चार पैसे भी बच जाते है .

अभी चार दिन पहले भी जब ये किसी NGO के काम से और एक शादी में भारत आये थे तो ढेरों लेडीज सूट लेकर आये थे. दिल्ली उतरते ही इन्होंने अपने पुराने कस्टमर मणिशंकर अय्यर , मनमोहन सिंह , हामिद अंसारी आदि को फोन कर दिया था कि माल लाया हूँ ..कहाँ मिले ? आखिर में मणिशंकर अय्यर का घर फायनल हुआ . सारा माल हाथोंहाथ बिक गया . इस मीटिंग के बारे में किसी को इसलिये नही बताया गया क्योँकि आपको तो पता है महिलाएँ कभी किसी को नही बताना चाहती कि उन्होने कौन सी चीज कहाँ से खरीदी है .

अब मोदीजी को देख लो .. अपने ‘मोस्ट फेवरेट नेशन’ से कोई व्यापारी माल बेचने आया तो उसका मुद्दा बना दिया. देखिये असल बात ये है कि मोदीजी ने जब नवाज शरीफ की माताजी के लिये शॉल भेजी थी और शरीफ ने मोदीजी की माताजी के लिये जो साड़ी भिजवाई थी वो सूती और सस्ते कपड़े थे इसलिये खुले में , सबको बताकर दिये गये जबकि मेहमूद कसूरी जो सूट लेकर आये वो महँगे सूट है .. बताने पर किसी की नज़र भी लग सकती है इसलिये मीटिंग गुप्त रखी गई . मोदीजी ने तो जबरन ही बात का बतंगड़ बना दिया.
Ashish Retarekar

Author: admin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *