ये मंदी नज़र आने लगती है

नोटिफिकेशन की लत भी वैसी ही होती है जैसे बड़ी दूकान के गल्ले पर बैठे सेठ को नोट गिनने की . पाँच-दस मिनिट तक अगर उसके हाथ में हिसाब करने के लिये नोट नही आये तो उसके मुँह से निकलेगा .. आज तो मंदा है , काम ही नही है .. वेसे ही अगर आप लॉगिन करो और 80-90 नोटिफिकेशन ना हो , तो लगता है .. मंदी चल रही है . तीन-चार दिन तक कोई पोस्ट ना लिखो तो ये मंदी नज़र आने लगती है. भगवान की बड़ी कृपा है कि अरविंद शर्मा जी को मैंने ‘क्लोज फ्रेंड’ किया हुआ है .. इसलिये जब भी लॉगिन करो घोर गरीबी का अहसास नही होता . हमेशा 8-10 नोटिफिकेशन मिल ही जाते है .. अरविन्द शर्मा updated his status.’

शर्मा जी का पोस्ट लिखने का एवरेज ‘डॉन ब्रेडमैन’ के एवरेज से भी बेहतर है. बप्पी लहरी ने एक साल में 27 फिल्मों में संगीत देकर अपना नाम गिनीज बुक में लिखवाया ..वहीं कुमार शानू ने एक दिन में 28 गाने रेकॉर्ड करके ये सम्मान पाया है.. इस हिसाब एक दिन में सबसे ज्यादा पोस्ट लिखने के लिये शर्माजी का नाम भी लिम्का बुक में तो आना ही चाहिये .

एक बार अरविंद जी के एक पुराने दोस्त का फोन आया. दोस्त बोला .. ‘ यार चार साल हो गये तेरी सुरत देखे .. कब आ रहा है मिलने ? अरविंद जी ने भावुक होकर फोन काट दिया . फेसबुक लॉगिन किया और पोस्ट डाली .. ‘अगले महीने आता हूँ .’

अपने जेसे आम लोगों से फेसबुक पूछता है ..’What’s in your mind ! आपके दिमाग में क्या है ?’ शर्माजी को लिखा हुआ आता है ..’आपके दिमाग में क्या नही है ? ‘. थोड़ा अपडेट होने पर अब फेसबुक हमसे बोलता है ..’यहाँ कुछ लिखिये ! ‘.. वहीं फेसबुक शर्माजी से बोलता है ….’एकाध बार ओर कहीं भी लिखिये !’

दो महीनें पहले जब फेसबुक क्रेश हो गया था .. तीन-चार घंटे तक फेसबुक नही चल रहा था .. तब सबकुछ ठीक होने पर जुकरबर्ग ने शर्माजी को मैसेज किया ..’सॉरी.. आपकी 12 पोस्ट की भ्रूण हत्या के लिये हमें खेद है.’

अगर शर्माजी की लिखी सारी पोस्ट के प्रिंटआउट निकाले जाये तो कम से कम 10-12 जंगल पेड़ काटने में ही तबाह हो जायेंगे और अगर उन प्रिंटआउट को जलाया जाये तो कई ग्लेशियर पिघल सकते है.

जैसे कंजूस रुपया दाँत से पकड़ता है वेसे ही शर्माजी भी शब्द दाँत से पकड़ते है .. ज़ाया नही होने देते . शब्दों को कभी किसी कमेंट के रिप्लाई में खर्च नही करते .. उनका इस्तेमाल सिर्फ पोस्ट में ही करते है.

कल जिन चार जजों ने प्रेस कांफ्रेंस कर बोला कि .. ‘हमने चीफ जस्टिस को एक काम करने के लिये बोला था , वो उन्होनें नही किया . आज लोकतंत्र खतरे में है.’ .. इस सारे हो-हल्ले के बीच आपको अबतक ये पता नही लग पाया कि वो काम कौन सा था ? विश्वस्त वाम सूत्रों से पता चला है कि .. ये चारों जज जस्टिस दीपक मिश्रा से माँग कर रहे थे कि अरविंद शर्मा एक दिन में कितनी फेसबुक पोस्ट कर सकते है , इसकी लिमिट तय की जाये . इनकी धड़ाधड़ पोस्ट से लोकतंत्र को खतरा है . शर्माजी ने भी इसकी भनक लगते ही परसों एक पोस्ट डालकर साफ कर दिया कि .. ‘ये सब मेरी पोस्ट नही , मेरा दिल है.’ एक ब्राह्मण के दिल की यहीं बात दूसरे ब्राह्मण दीपक मिश्राजी के दिल को छू गई और देश के सामने चारों जज बेनकाब हो गये .

मल्टीनेशनल कम्पनियों का उसूल होता है कि प्रोडक्शन में ना क्वांटिटी कम होना चाहिये और ना क्वालिटी . यही नियम अरविंदजी पर भी लागू होता है . पोस्ट कितनी भी हो .. क्वालिटी से कोई समझौता नही होता . इसीलिए महीनों से क्लोज फ्रेंड होने के बाद भी कभी अनफालो करने का ख्याल भी दिमाग में नही आया . कभी कभी तो लगता है .. मैं अपनी ही कोई पोस्ट पढ़ रहा हूँ . सही बोलूं तो अरविंद जी फेसबुक के शंकर-जयकिशन है.. जो साल भर में 15 से 20 हिट फिल्में देते थे और एक एक फिल्म में 6-7 या 8 गानें होते थे लेकिन मेलोडी से कोई समझौता नही होता था. अभिभूत हूँ कि मैं अरविंद शर्मा जी की लिस्ट में हूँ .
Ashish Retarekar

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