आज मेरी शादी को अठारह साल हो गए हैं

सोनू….. अरे बेटा ,जरा रसोई में सब्ज़ी तो चला दे कही जल ना जाए। मॉं ने ऑंगन में गेहुँ साफ़ करते हुए आवाज़ दी ,और मैं टी.वी पर अपनी मन पसन्द फ़िल्म देखने में मस्त। मैंने सुन कर भी अनसुना कर दिया और मन में सोचा अच्छी गरमी की छुट्टियाँ पड़ी हैं,मॉं तो बस काम ही बताती रहती हैं। लेकिन थोड़ी देर में मॉं ग़ुस्से में आई और बोली ,”सुनाई नहीं दिया था क्या ?” सारी सब्ज़ी जल गई न।

मॉं की डॉंट पड़ने पर मैं ग़ुस्से में थी और मैंने पापा को शाम को अॉफिस से घर आते ही मॉं की शिकायत लगा दी। तो पापा ने मुझे प्यार से पास बैठाया और बोले, बेटा क्या तुम्हें नहीं चाहिए था कि तुम अपनी मॉं की बात को सुन कर अमल करती? वो भी तो काम ही कर रही थी ,सारा दिन लगी रहती है तुम जो फ़रमाइश करते हो उसे पूरा करती है या करने की कोशिश करती है पर तुम अभी नहीं समझोगी ,ये कह कर पापा मॉं की बनाई हुई चाय पाने लगे। मैंने भी मॉं को सॉरी कह कर अपना फ़र्ज़ निभाया।

आज मेरी शादी को अठारह साल हो गए हैं और मैं रसोई में काम करते हुए ये सब बातें याद कर रही थी। अब मैं भी अकेले ही सब मैनेज करती हूँ जब कभी टीना मेरी बेटी,जो कि सोलह की है ,को मैं कुछ काम बताती हूँ तो वो भी अनसुना करती है।आज मुझे पापा की बात का मतलब समझ आया वो कहना चाह रहे थे जब मैं इस स्थिति में आँउगी तब समझुंगी। मैं अतीत से बाहर आई और टेबल पर डिनर लगाने लगी। डिनर के बाद जब मैंने टीना को कहा कि टेबल क्लीन करने में मेरी मदद कर दे तो झट से उसके पापा बीच में बोल पड़े अरे यार! तुम भी बस हद करती हो, अभी से काम में लगा लो बच्ची को। तुम्हें भी कौन सा इतना काम होता है दिनभर। ये सुनते ही टीना बोली,”पापा मम्मी तो बस सारा दिन काम ही बताती रहती। ” ये कह कर बाप बेटी टी.वी देखने में मस्त हो गए और मैं रसोई में बर्तन साफ़ करने आ गई। और सोचने लगी क्या इतिहास अपने आप को दोहराता है बस फ़र्क़ इतना है कि वहाँ पापा ने मुझे समझाया था कि मम्मी भी थकती है , यहॉं टीना के पापा ने कहा कि कौन सा इतना काम होता है जो इससे मदद चाहिए। बल्कि टीना के पापा को भी शायद यही समझाना चाहिए था कि बेटा मॉं भी थकती है उसे भी हेल्प मिल जाएगी।

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