मुल्क की आजादी के मौके पर एक गीत हाजिर है।

दुनिया में पहचान बनाने की कोशिश।
अच्छा हिंदुस्तान बनाने की कोशिश।।

हिंदू मुस्लिम भाई चारा रखते हों।
सुख दुख में सब साथ गुजारा रखते हों।
मंदिर मस्जिद चर्च गुरूद्वारा रखते हों।
हमने देखा ख़ाब वो प्यारा रखते हों।
इंसा को इंसान बनाने की कोशिश।
अच्छा हिंदुस्तान बनाने की कोशिश।।

धर्म से ज्यादा देश को प्यारा रखते हों। सब चिन्हों में झंडा न्यारा रखते हों।
आखं में अपनी देश को तारा रखते हों।
इस गुलशन को सजा संवारा रखते हों।
दुर्जन को रहमान बनाने की कोशिश।
अच्छा हिंदुस्तान बनाने की कोशिश।।

न ये उसका न ये हमारा रखते हों।
सारी बुराई से वो किनारा रखते हों।
खून बहे न कभी गवारा रखते हों।
हम उनका वो साथ हमारा रखते हों।
विष को है मिष्ठान् बनाने की कोशिश।
अच्छा हिंदुस्तान बनाने की कोशिश।।

जो मेरा वो अपना नारा रखते हों।
इंकलाब का जज्बा सारा रखते हों।
दुश्मन को हम नौ दौ ग्यारा रखते हों।
उसके ऊपर नजर नजर दोबारा रखते हों।
खुद को है गुणवान बनाने की कोशिश। अच्छा हिंदुस्तान बनाने की कोशिश।।

मुज़फ़्फ़र परवेज़ बुदनी

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