देश का नाम ही मिट्टी में क्यों ना मिल जाए

दुनिया में सबसे ज़्यादा रेप होने वाले देश में अमेरिका तीसरे स्थान पर है। जी हाँ अमेरिका। पर क्या कभी आपने एंजलीना जॉली, ड्वेन जॉनसन, आरनॉल्ड, विन डीजल, स्कारलेट आदि को हाथ में पर्चा लेकर बलात्कार के नाम पर अपने ही देश की बेइज्जती करते देखा है?? यकीनन नही देखा होगा। फिर भारत में क्यों

“समाजवाद” भी अंततोगत्वा फेल हो जाएगा

एक स्थानीय कॉलेज में अर्थशास्त्र के एक प्रोफेसर ने अपने एक बयान में कहा – “उसने पहले कभी किसी छात्र को फेल नहीं किया, पर हाल ही में उसने एक पूरी की पूरी क्लास को फेल कर दिया है l” क्योंकि उस क्लास ने दृढ़ता पूर्वक यह कहा था कि “समाजवाद सफल होगा और न

क्या है ‘मास्टर ऑफ द रोस्टर थ्योरी’?

क्या है ‘मास्टर ऑफ द रोस्टर थ्योरी’? नवंबर 2017 में सुप्रीम कोर्ट के कॉन्स्टिट्यूशनल बेंच (संवैधानिक पीठ) ने अहम फैसला दिया था. पांच जजों की बेंच ने अपने फैसले में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया को ‘मास्टर ऑफ द रोस्टर’ बताया. इसके अनुसार चीफ जस्टिस अपने विवेक से यह तय कर सकता है कि कौन से

आज रात के बारह बजे से… दो हज़ार….

सोचिये कि शाम आठ बजे अचानक कोई सफ़ेद दाढ़ी वाला सांप्रदायिक व्यक्ति टीवी पर आये और अटक अटक कर बोलना शुरू करे : मितरों…. आज रात के बारह बजे से… दो हज़ार…. बस इतने पर तो कईयों को यही सोचकर दिल का दौरा पड़ जाएगा कि शायद दो हज़ार का नोट भी गया ! मगर

आज के अदालतों के हालात

एक सत्य घटना –बहुत कुछ कहती है – समझने की जरूरत है आज के अदालतों के हालात पर – ये एक सत्य घटना है जो मैं लिख रहा हूँ –ये घटना उस दिन की है जिस दिन मोदी ने नोट बंदी की घोषणा की थी — मेरे एक मित्र दिल्ली में रहते हैं –उस रात