कुछ अलग जरा सा जी लो तुम

सादा जीवन तो जीते सब,

कुछ अलग ज़रा सा जी लो तुम।

पयपान सुधा तो पीते सब,

जीवन गरलों को पी लो तुम।

जो बीत गयी सो बात गयी,

नहि उनसे अब कुछ पाना है।

जीवन को दो अब लक्ष्य एक,

दुष्कर दुर्गम पर जाना है।

उस लक्ष्य मोति को पाना है,

श्रमसागर में डुबकी लो तुम।

सादा जीवन तो जीते सब,

कुछ अलग जरा सा जी लो तुम।

@akchearts

Ashish Jee
Ashish Jee

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