आईपीएस मैडम के आँसू

आईपीएस/आईएएस का आंसू तो जनता के आंसुओं से एक करोड़ गुना महंगा होता है न?फिर शराबियों की पत्नियों की आंसू की भला क्या कीमत।
उसे कहाँ बिना जबाबदेही के ग्रेड-1 का पे मिलता है।आंसू तो हमेशा लोकतंत्र के कब्जेदरो की ही कीमत होती है।
आखिर जनता के चुने विधायक की क्या हैसियत वह लोकतंत्र के कब्जेदारों को डांट दे!
मालिक-मुख्तारों के आंसू देखे नही जाते।
बस जनता को पीटने वालो की आँख में आंसू नही आने चाहिए।रोने का काम जनता का है।
साथ उसके हिस्सेदारों कट्स,कमीशन वालो पर जरा भी असर नही पड़ना चाहिए।
यह हमारा फर्ज है हम रोज मार खाये और रोये।
सपा/बसपा की सरकारे और गुंडे ही इलाज है।
उनके समय पर कई बड़ो की थाना जल/पिटाई/हत्याएं तो उनके अधिकार है।
भाजपा विधायक के’बात करने से मना करने, जैसे बड़े-वीभत्स अपराध की सजा ‘मौत,होनी चाहिए।
पूरे देश में इन लोगों के हाथ में ही सारी सत्ता है।इनसे कोई बात करने से भी नहीं मना कर सकता है,उसकी यह हिम्मत,! आप कैसी बात कर रहे हैं?

शराबबन्दी या अन्य विषय बिलकुल भी महत्त्वपूर्ण नही है।महत्वपूर्ण है 5 साल बनाम पैतीस साल,या जबाबदेही बनाम गैर जबाबदेही,निर्णय बनाम अनुर्णय,चयन बनाम चुनाव,अस्थाई बनाम स्थाई,जनाधिकार बनाम लाल-फीताशाही रही!
अधिकार की बात, वह तो केवल अंध-विरोधियो के सुरक्षित हैं।भला पुलिस और पुलिस वालों के अधिकार को कौन चैलेंज कर सकता है, वह जिसे चाहे मारे,एनकाउंटर करें, कूटे,पीटे,जेल डालें, पुलिस अधिकारी हैं तो 35 साल तक कूटने पीटने का अधिकार मिल ही गया। इस विधायक साले की हिम्मत कैसे पड़ गई कि इसने बात करने से मना कर दिया। मैं बड़ा चिंतित हूं।यह लोकतंत्र में ये क्या हो रहा है?भला जनप्रतिनिधियों के पास कैसे अधिकार रखा जा सकता है।उस पर से भाजपाईयो को दे दिया जाये,चुने हुये भाजपायो को।उसको तो सरकार में रह कर भी बोलने, बात करने का, कुछ कहने का बिल्कुल अधिकारी नहीं दिया जाना चाहिए।वह सारे अधिकार जन्मजात विरोधियों नकारात्मको पास सुरक्षित रहने चाहिए।

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