वैज्ञानिक प्रतिभा का खजाना है अपना यशार्क

यह युवा लड़का(मैट डेमन) एक स्वीपर है।वह दुनिया की सबसे मशहूर महत्वपूर्ण इंस्टीट्यूट में सफाई का काम देखता है। फिजिक्स का नामी विद्वान् प्रोफेसर डेली एक सवाल छोड़ देता है।ब्लैक बोर्ड पर कोई चुपचाप हल कर के चला जाता है।फिजिक्स के इतने कठिन,जटिल विषयों से रिलेटेड इन प्रश्नों को कौन हल कर देता है इसको लेकर पूरी इंस्टिट्यूट परेशान है।असल में वह सवाल खुद प्रोफेसर भी हल नही कर सकते इस लिए वहां लिख कर छोड़े गए थे।बहुत कठिनाई से अंत में वह प्रोफेसर उस लड़के को खोज निकालता है।वह भौचक है यह एक स्वीपर इतना कठिन सवाल कैसे हल कर रहा है।वह जोर डालता है कि मैट पढ़ाई करे।वह लड़का पढ़ना नहीं चाहता क्योंकि उसकी परिस्थितियां डिफरेंट हैं।वह आपराधिक दुकान वाला युवा है।केमिकल और फिजिक्स जन्मजात गुणों के रूप में उसे प्राप्त है।कठिन से कठिन,गूढ़ से गुड़,जटिल से जटिल विषयों को वह हल कर लेता है। लेकिन वह स्कूल-कॉलेज में नहीं गया है ना जाना चाहता है।वह किसी भी तरह इससे बचता है।उसे इन बेकार चीजो में अपना कैरियर नही बनाना।क्योकि उसे यह सहज ही आता है।अब प्रोफ़ेसर उसे किसी भी तरह अपने नोबेल प्राइज पाने के लिए उपयोग करना चाहता है। युवा किसी भी तरह उसके पढ़ाई वाले झांसे में नहीं आता। वह चाहता है कि वह जैसी जिंदगी जी रहा है वही जीए।अब प्रोफ़ेसर ने अपने एक पुराने साथी जो विलियम रॉबिंस को जो मनोवैज्ञानिक क्षेत्र का बहुत बड़ा आदमी है।उसको लड़के की रुझान बदलने के लिए मदद मांगता है।यह पूरी फिल्म विलियम रॉबिंस उस प्रोफेसर और फिजिक्स केमिकल और विभिन्न विषयों के इर्द-गिर्द घूमती है। अंत में एक निष्कर्ष पर पहुंचती है कि आदमी को जो सुकून पहुंचाये वह करना चाहिए न की जीवन की आपाधापी में फंस कर वर्तमान बर्बाद करना चाहिए।इतना जटिल,बोर विषय होते हुए भी फिल्म को आप बीच में छोड़ कर उठ न पाएंगे।

हॉलीवुड की मेगाहिट फिल्म “गुडविल हंट,मशहूर अभिनेताओं मैट डेमन,बेन अफ्लेक और रॉबिन विलियम्स की सुपरहिट फिल्म थी।5 दिसम्बर 1997 को रिलीज इस विषय पर ऐसी फिल्म आज तक नही बन सकी।न ही मुझे इस तरह की फिल्म कभी दिखी।मानवीय प्रतिभा उसकी सोच और इच्छाओं पर इस से बेहतर फिल्म दुनिया भर में कहीं नहीं बन पाई है।वैसे भी रॉबिन विलियम और मैट दोनों इतने मंजे हुए अभिनेता है कि आपको एक नए विषय पर सोचने को मजबूर कर सकते है।इसके डायरेक्टर थे गस वैन सेंट।यह फिल्म एकेडमिक जीवन और संस्थाओं में असली प्रतिभा,प्रोफेसरों और मठवादी वैज्ञानिकों के बीच में साजिशी संघर्ष को दर्शाती है।

कोई जरुरी नहीं की असली प्रतिभा स्कूल या संस्थाओं या विद्यालयों से ही निकले। वह प्रायः जन्मजात होती है और उन्हें विकसित करना संस्थाओं का लक्ष्य होना चाहिए।लेकिन इन प्रतिभाओं का परिस्थियां,आंतरिक संघर्ष,मनोभूमिका,इच्छाएं कामनाएं और जीवन के उद्देश्य हमेशा डिफरेंट होते हैं।फिल्म केवल मात्र 1 लाख डालर में बनी थी,उसने 3 बिलियन डॉलर कमाये थे।उसे सैकड़ो अवार्ड मिले थे।वह अपने में एक रिकॉर्ड है।हम भी कभी न कभी इस तरह की फिल्म बनाएंगे।
इसी से मिलती जुलती फिल्म लियोनार्डो डिकैप्रियो और टॉम हैंकस की फिल्म “कैच मी इफ यू कैन,भी देखना चाहिए आपको मजा देगी।

विज्ञान के बहुत सारे विषय जटिल,गूढ,कठिन और रहस्यों से भरे होते हैं। अमूमन अब मैं उन्हें समझने की कोशिश नहीं करता,क्योंकि उनकेउनकी भाषा, उनकी अंग्रेजी,टर्मोलाजी, विषयों से ज्यादा भरी भारी होती है।वह समझने के लिए उतना ही दिमाग़ लगाना पड़ता है।बहुत सारे लोगो की तरह मुझ में भी विज्ञान की समझ कम है। लेकिन मैं कल यशार्क पांडे जी से मिला और मैंने विज्ञान के बारे में अपनी समझ में बदलाव महसूस किया।वैसे तो सारे बनारसी किसी न किसी प्रतिभा से भरे होते है लेकिन यशार्क जी पैदाइशी वैज्ञानिक है।यदि उन्हें समय पर संस्थाएं पकड़ लेती तो देश को आज कई आविष्कार मिल चुके होते।अथवा काश मुझे बचपन में यशार्क मिल जाते तो यह देश आज एक बड़ा वैज्ञानिक न खोता।कोई इतनी सरल भाषा में विज्ञान,साइंस टेक्नोलॉजी को लिख सकता है।मैं दंग हूँ यशार्क से मिल कर।जन्मजात वैज्ञानिक प्रतिभा से भरा मैट डैमन….।

मुझे लगा अगर कोई सरल तरीके से विज्ञान को भारत में समझाएं,लोगों को पढ़ाए उसको स्थापित करें तो भारत में विज्ञान बहुत प्रगति करेगा।जिसे कांग्रेसियो,और कम्युनिष्टों ने प्लान करके नष्ट किया।वे कभी सरल-सहज रूप कभी अकादमिक जगत में विज्ञान को आने ही नही देते थे।कठिनता बनाये रखने के पीछे कुत्सित उद्देश्य समझना ज्यादा कठिन नही है।

चूकीं मैं विज्ञान,टेक्नोलॉजी और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में जॉब कर रहा हूं तो देशभर में मेरा ऐसे हजारों वैज्ञानिकों,इंजीनियरों और निवेशकों से परिचय होता रहता है।मैं उनमें से कइयो को नजदीक से जानता हूं।लेकिन मुझे विज्ञान के बारे में जितनी स्पष्ट समझ,जितनी क्लियर बात और उन कठिन से विषयो को सरल तरीके से प्रस्तुत करने की प्रतिभा यशार्क दिखी वह मुझे आज तक कभी नहीं मिली थी। वह विज्ञान से भरी हुई प्रतिभा के खजाने हैं।
प्राकृतिक रूप से विज्ञानिक प्रतिभा का खजाना है वह।हालांकि विषम परिस्थितियों वश उन्होंने कोई ऊंची मोटी डिग्री तो प्राप्त नही की है।लेकिन कठिनतम विषयो को जिस तरह से वह बहुत सरल,सीधे,सहज और सार्थक तरीके से समझाने माहिर है वह अदभुत है।उनके लेखन और इस गुण का लाभ यदि देश न उठा सका तो यह दुर्भाग्य ही होगा।गुडविल हंट की कोशिश में लगिये।

Pawan Tripathi jee ki kalam se

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