साईकिल चोरी हो गई

दरवाजे पर दस्तक हुई…“पोदा” ने जैसे ही दरवाजा खोला, “परन्थामन” थके कदमो से , भीतर आया..!!!

अरे ये क्या, “साईकिल” कहां छोड़ आये..??

पोदा ने हमेशा की तरह सवाल दागा..!!!

परन्थामन, कोई जवाब दिये बिना, टूटी चारपाई पर लेट गया..!!!
विचारो के , झंझावात ने उसे बुरी तरह जकड़ा हुआ था..!!!
कैसे उसने और पौदा ने पाई-पाई बचाकर , ये सैकंड हैंड, साईकिल खरीदी थी… पूरे साढे पांच सौ में..!!!
अभी तीसरा दिन ही तो था, जब वो साईकिल पर , 12 किमी दूर , लोहा पिघलाने वाली भट्टी मे काम पर जा पाया था..!!! नहीं तो , सात साल तो उसने , 24 किमी, रोज़, कदमो से नाप डाले थे..!!!

पर हाय रे, गरीब के सपने….अारज़ू,
कलियुगी पाप की श्रेणी मे आता है जी..!!!

“साईकिल चोरी हो गई…”

वहीं भट्टी के बाहर से….

कुछ दिन मे ही,परन्थामन , ने इसे नियती मान लिया… अर्रे , ऊपर वाला भी, गरीब और दुखियारों को, और दुखी रखना चाहता है..

“कही जो ये सुखी हो गया तो, सुमिरन करना ही ना छोड़ दे..”

पैसे वाले, सुखी सम्पन्न तो दुनियां जहान के पुन्न करते है..उनको दुखी रखना ,उचित होगा भला…बताओ..ये भी कोई बात हुई…..!!!

महीना भर बीत गया, इस विपत्ती को..

एक दिन , घर लौटा तो, पोदा दरवाजे पर ही खड़ी थी..आते ही, लपकी और बोली, “जल्दी थाने पहुंचो, सुना है पुलिस वालो ने , साईकिल चोरो का गिरोह पकड़ा है, कई सारी , साईकिलें भी जब्त की हैं, हो सकता है, हमारी भी मिल जाये…

परन्थामन, उल्टे पैर दौड़ा…

वाकई मे, थाने मे 25-30 साईकिले खड़ी थी..परन्थामन की आंखो मे, आशाओ के ज्वार टकराने लगे…
डरते-डरते, बाहरी कुर्सी पर बैठे सिपाही जी से फरियाद की…

साहेब , मेरी साईकिल चोरी हुई थी, महिना दिन पहले.. बड़ी जौड़-तौड़ से खरीद पाया था..
देखिये ना, शायद ईस झुंड मे मेरी भी हो…

हा जरूर..आओ देख लो….

कौन कहता है, पुलिस मे अच्छे लोग नहीं होते..देखो, कितना भला आदमी है…

अर्रे..ये तो रही…लाल सीट वाली..देखो, हैंडल मे “पोन्नई अम्मा” की चुनरी भी बंधी है…यही तो है…

पक्का यही है…

खुशिंयो, का सैलाब, परन्थामन के पलकों के “बांध” को तौड़ कर बह निकला..!!!

कोई बात नहीं….मिल जायेगी…कल, बिल दिखा कर, रजिस्टर मे साईन करके, अपनी साईकिल ले जाना….

साहेब, बिल तो नहीं है, सेकंड हैंड जो खरीदी थी…
अबे, हमे चु’ समझा है क्या बे…बिना बिल का ना मिलने वाली..

सुन, एक तरीका है..300 दे दे..और कल साईकिल ले जाना…सिपाही साहेब ने, जरा कोने मे ले जाकर कहा…

“300”

साढे पांच सौ मे तो, खरीदी ही थी…अब 300/कहां से लाऊं…
तो फिर भाग यहां से, नहीं तो तुझे भी साईकिल चोरी के केश मे, अन्दर कर दूंगा…भिखारी कहीं का…!!!
ठीक है साहेब, करता हूं कुछ ईंतजाम.. कहकर ,परन्थामन थके कदमो से घर लौट चला..!!!
पड़ोसी , लाला जी से 300 “सूद” पर उठाकर , वो सुबह-सुबह ही थाने पहुंच गया..!!!

सिपाही जी, तो जैसे उसी की बाट जोह रहे थे… फटाफट , 300 रू “अंटी” किये..रजिस्टर मे परन्थामन के दस्तखत करवाये, और साईकिल सौंप दी….

“अर्रे.. साहेब.. इसके तो दोनो पैडल गायब है…”

भागता है हरामी, या उठाऊं पुलिसिया लठ्ठ

परन्थामन, साईकिल का हैंडल पकड़ कर दौड़ पड़ा…जैसे कोई धावक, ओलम्पिक की “रिले दौड़” मे भागता हो..

Pawan Acharya

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