तरक्की के पायदान कैसे चढ़ा…?? ईंग्लैंड कैसे पहुंचा..??

“नेपच्यून इंजिनियरिंग” के बाद मैने भिवाड़ी की एक कंपनी मे एज़ ए “मेन्टनैन्स इंचार्ज” जोईन किया..!! बड़ी कंपनी थी, प्रोजेक्ट और सर्विस बेस काम करने के बाद..पहली बार प्रॉडक्शन सेक्टर मे मेनटैनेन्स का काम करना उतना दूभर नहीं होता.. लेकिन बात-बात पर गलीच लोग आपको याद दिलातें रहतें हैं कि आपको प्रॉडक्शन सेक्टर का अनुभव नहीं है..!!

खैर मुझे इस बात की परवाह नहीं थी, क्योंकि बॉस बेहतरीन मिले थे..!! सरदार जी थे..!! वो भी अथाह मेहनत के कारण उच्च पद पर पहुंचे थे..!!

पूरे प्रॉडक्शन डिपार्टमैंट के मेरे खिलाफ होने के बावजूद उनका मुझे बेहतरीन सपोर्ट था..!! उस समय मुझे गुस्सा भी बात-बात पर आता था..डेली कोई न कोई मुझसे पिला जाता..!!

सरदार जी कहते..

पंडत..तुझे तो सरदारों वाला गुस्सा आता है..!!

लगभग एक वर्ष के बाद सरदार जी किसी दूसरी कंपनी मे चले गये …

उन्ही दिनो..“टाईम्स ऑफ इंडिया” के “ऐसेन्ट” सैक्शन मे एक विज्ञापन देखा..

“जॉब इन यू के”

दिल्ली की कोई प्लेसमैन्ट ऐजंसी , रिक्रुटमैंट कंडक्ट कर रही थी..!! नाम था “ACE overseas” ..!! पटपड़गंज मे उनका ऑफिस था..मैने भी अपना सी वी भेज दिया..!!

लगभग पांच -सात दिन बाद उनका मेल आया..कि आप रिटन एग्जाम के लिये फलां तारीख को हाजिर हो जाइये..!!

मुझे भीतर से ये एहसास था कि, ऐसी ऐजंसियां अक्सर ठगी करती है..तो मैने कोई खास तवज्जो नहीं दी..!!

और उसी दिन मेरा भिवाड़ी की एक दूसरी कंपनी मे भी इंटरव्यू था..मैने सोचा.. ईंग्लैंड जाने की प्रायिकता तो ना के बराबर है, ये इंटरव्यू क्यों छोड़ा जाये..!!

इसलिये दिल्ली ना जाकर मै उसी देशी कंपनी मे इंटरव्यू के लिये चला गया..!! उन हरामखोरों ने दिन भर बिठा कर रखा.. लेकिन इंटरव्यू नहीं लिया..!!

मुझे इंग्लैंड मिस करने से ज्यादा इस बात का दुख था कि , साला एक छुट्टी बरबाद हो गई..!!

खैर..बात आई गई हो गई..!! तीन-चार दिन बाद मुझे एक फोन आया..

“मिस्टर आचार्य..वी आर कंडक्टिंग लास्ट राऊण्ड ऑफ रिटन एग्जाम ऑन कमिंग संडे.. रिमैम्बर दिस इज ए फाइनल चांस..वी हैव कॉल्ड यू जस्ट बिकॉज आवर “यू के” क्लाइंट वांटेड अस टू डू सो”

प्लीज रीच एट शार्प टैन-ओ-क्लॉक..ऑन संडे…इफ यू विश.

मैने कहा..ओ के ..सर्टनली सर..!!

संडे था..सोचा चक्कर लगा कर थौड़ा माजमा ले लेते हैं..!!

अपने कॉलेज के लंगोटिया यार Praveen को फोन किया..जो दिल्ली मे सैटल हो चुका था..!! सुन…मै आ रहा हूं.. बढिया खाने -पीने का इंतजाम कर दियो…तेरी आवभगत से अगर विप्र देवता प्रशन्न हो गये तो भवसागर तर जायेगा..!!😂

दूसरे दिन सुबह प्रवीण ने मुझे.. पटपड़गंज मे ठीक उसी ऑफिस के बाहर ड्रॉप कर दिया..!! शानदार ऑफिस थी..Ace overseas की..!! काफी बड़ा स्टाफ था..पहली नजर मे ही लगा कि ..ये फर्जीवाड़ा नहीं हो सकता..!!

अंदर जाते ही , एक बंदे ने मेरा नाम पूछा..और मुझे एक क्वैश्चन पेपर पकड़ा दिया..!!

यू हैव फोर्टी मिनट्स टू ऑन्सर दिस पेपर”

सत्तर सवाल थे , लगभग पचास ऑबजेक्टिव टाईप और बाकि के निबंधात्मक आन्सर वाले..!! निबंधात्मक प्रश्न ज्यादातर “सेफ्टी मेजर” के थे..

पीछे देखा तो.. लगभग दस-बारह बंदे..पहले से ही एग्जाम दे रहे थे..!!

साला..कॉलेज के छ: साल बाद भी पर्चे लिखने पड़ेंगे..ये सोचा नहीं था..!! फिर.. दिमाग मे आया कि..जब आ ही गये तो ..“फट्टे चक के ही जायेंगे”

ताबड़तोड़… पेपर भर दिया..!! सही या गलत..ये नहीं सोचा..!!

पेपर सबमिट करने के बाद..भाईसाहब बोले ..

वी विल..अनाऊन्स आवर रिजल्ट इन ए वीक, ऑन आवर वैबसाईट..प्लीज कीप एन आई”

वापस भिवाड़ी आ गया..!!

चार-पांच दिन बाद ही लिस्ट निकल गई..!! पवन आचार्य का नाम भी था लिस्ट मे..!!

फिर मेल आया..!!! अब एक टेक्निकल इंटरव्यू होगा..!! फलां तारीख को..!!

तीन खांटी इंजिनियरिंग के बुढ़ऊ बिठा दिये थे..!! तबियत से रगड़ने वाला इंटरव्यू ले रहें थे..!! आग मे तप कर “सोने से कुंदन” हुए बंदे जो ढूंढ रहे थे..!!

इंटरव्यू हुआ..!! रिजल्ट का इंतजार था..!!

फाईनल लिस्ट निकली..ऊपर से तीसरा नाम पवन आचार्य का था..!! साथ ही इंस्ट्रक्शन थी..कि जल्दी ही तुम्हारा कोन्ट्रेक्ट और “वर्क परमिट” आ जायेगा..पासपोर्ट रैडी रखो..!!

साथ-साथ ..मेलबाजी लगातार चल रही थी..!! इंटरव्यू के दौरान कुछ लोगो से पहचान हुई जो मेरे साथ सैलेक्ट हुए थे..!!
बहुत हद तक तय हो चुका था.. ईंग्लैंड जाना है..!! सब अपने-अपने तरीके से..कंपनी और ईंग्लैंड के बारे मे सुचनाएं इकठ्ठा कर रहे थे..!!

ईंग्लैंड की लाईफ-स्टाईल कैसी है..??काम कैसा है..??हमारा जॉब क्या होगा..?? पैसा कितना मिलेगा..?? पहुंचेंगे कैसे..??कयास लगाए जा रहे थे..!!

सब एक दूसरे को सुचनाएं शेयर करने लगे..!!

अपन इन सब से बेफिकर..!!

एक दिन मेल आया कि फला तारीख को क्लायंट आ रहें हैं..!!
नेहरू प्लेश मे हॉटल “इंटरकोंटीनेंटल” मे इंटरव्यू होगा..!! पासपोर्ट और बाकि डॉक्यूमेंटस लेकर पहुंचो..!!

अब मेरे पास तो पासपोर्ट ही नहीं..!! ताबड़तोड़ पासपोर्ट की कार्यवाही शुरु की गई..!! अरजेन्ट वाली..!! लगातार जयपुर के धक्के खाये..!! वर्क-परमिट आने से पहले.. पासपोर्ट मेरे हाथ मे था..!!

वो दिन भी आ गया… क्लायंट इंटरव्यू वाला..!!

बाहर Ace overseas के मैनेजर ने समझाया..कि कोई बीड़ी-सिगरेट पीकर ना आये…ये पेपर इंडस्ट्री है..स्मोकिंग वाले बिना किसी वजह रिजेक्ट हो सकतें हैं..अगर जरा सी भी बदबू आई..!!

लो कल्लो बात..!!

इत्ति पुरानी आदत नूं ही छोड़ दे क्या..!! सूटा तो भाईसाहब लगेगा ही..!! क्या है कि किसी नशेबाज को अगर नशा करने से रोका जाये ना..तो उसके अंदर पता नहीं कौन से हार्मोन सृजित होतें हैं कि जो उसे फॉर्स करते हैं कि जा…अभी नशा कर..!!

मै चुपचाप गया..दो “नेवी-कट” खींच डाली..एक के बाद एक..!!

कॉन्फीडेंस लेवल ..हिमालय से भी ऊंचा पहुंच चुका था..!!

तीन गोरे थे..दो अपने इंडियन..!! इंटरव्यू हुआ..!! अंग्रेजी पर अच्छी पकड़ यहां काम आई..!! सवालों के जवाब सही दिये या गलत..ये “राम जी” बेहतर जानते थे..!!

फिर वो दिन आया.. फाईनल लिस्ट के साथ .. वर्क-परमिट आने की सूचना..!! आखिरी दस बंदो मे अपन भी थे..!!

अब तक मैने घर पर किसी को भी, इस बारे मे नहीं बताया था..!! घर पर “दूसरे मेहमान” के आने की तैयारी थी..!!

सोचा.. पत्नी-श्री को बता दूं..!!

मै ईंग्लैंड जा रहा हूं..!!

क्यों..?? कब..?? कैसे..??

बस..एक साल के लिये..!!

यहां क्या कमी है..??

तेरे-मेरे लिए तो कमी कुछ नहीं.. लेकिन बेटी और इस नये मेहमान के भविष्य के लिये..ये ट्राई मारना पड़ेगा..!!

वो समझ गई…जैसा कि अक्सर होता आया था..सी वाज एग्रीड..!!

कुछ भी गडबड लगे..वापस लौट आना..तुरंत..!!

पक्का..!!

पापा..का रिटायरमेंट नजदीक था..बड़ोदा मे पोस्टेड थे..!! फोन पर पूरी कहानी बताई..!!

जबरदस्त खुश थे..!!

रिस्तेदारों, पड़ोसियों को तो उसी दिन बताया जब वीजा और टीकट हाथ मे आ गई थी..!!

30 मार्च , 2007 को पवन आचार्य पहली बार, “चील गाड़ी” मे बैठने चले थे..वो भी पहली बार..!!

कान्हा ने श्रीमद्भाग्वत-गीता मे यूहीं थौड़े ना कहा है..

बार-बार HR department मे जाकर पूछो मत..

कायदे से अपनी मजदूरी किये जाओ…जब-जितना इंसैटिव और बोनस बनता जायेगा…मै देता रहूंगा..!!

कर्म करो कर्म..!!!

“जय श्री कृष्ण”

Pawan Acharya jee ki kalam se

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