लगातार उसी नजर को घूरने लगता हूं

जब भी बेटी के साथ बाहर निकलता हूं, बेटी लगातार मुझसे बाते कर रही होती है..सवाल पूछ रही होती है..और मेरी नजर चारों तरफ लोगों की “नजर” देख रही होती है..!! गलती से भी कोई नजर संदेहास्पद लगती है तो..लगातार उसी नजर को घूरने लगता हूं..!!

आज कल के माहोल ने मुझे ऐसा बना दिया है..!!

मेरा बस चले तो, उन गिद्ध-नजरों को नोच लूं..!!

खैर…..

एक बेटी का पिता होने के नाते मेरी सबसे बड़ी प्राथमिकता क्या होनी चाहिये..?? अच्छी शिक्षा के साथ डॉक्टर, IAS, IPS, साईंटिस्ट…या फिर किसी मल्टीनेशनल मे अच्छे पद पर..??

इससे ज्यादा मेरे या आपके जैसा मिडिल क्लास और क्या सोच सकता है..??

लेकिन पिछले चार दिन से मेरे दिमाग मे एक अजीब सा विचार कौंध रहा है..!! जब से रामपुर वाली घटना का विडियो देखा..!!और मेरे जले पर तेजाब तब पड़ा जब मैने , प्यारी सी बच्ची “नैन्सी” के बारे मे पढा..??

वो विचार ये है कि हमारी आकाक्षांओं को परे रखकर क्यों ना हम अपनी बेटीयों को “सैल्फ-डिफेंस” का कोर्स करवायें..!!

दुनिया भर की मार्शल-आर्ट मे से किसी एक मे उन्हे पारंगत करवाएं..!! आगे चल कर वो इसे प्रोफेशनली चयन करना चाहें तो अवश्य करें..!!

क्या कर लेंगे हम लोग..जब हमारी डॉक्टर बेटी..या फिर एसिपैरेन्ट IAS बेटी के साथ नैन्सी या रामपुर या बुलन्द शहर जैसा कोई हादसा हो जाये..??

क्या कर लेंगे ..इन डिग्रियों का ..इन पदों का..??

नैन्सी मेरी तो बेटी है..क्षमा कीजीये…“थी”

अर्रररे नहीं..वो तो आपकी बेटी है…क्षमा कीजीये…“थी”

जी हां.. भाईसाहब..आप से ही कह रहा हूं….आप..जो ये पढ़ रहे हैं..!!

शांत दिमाग से सोचिये.. विचार कीजीये.. मैने तो कुछ कदम उठा लिये है..छोटे ही सही…

आप भी उठाईये…..

Pawan Acharya

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