हत्या (एक छोटी कहानी)

मैं रात को ऑफिस से लौटने के वक़्त, एक जगह रास्ते में चाय
पीने को रुका। इतने में तीन ट्रक आ के
रुके, और उनमें से कुछ लोग उतर कर, रास्ता पूछने लगे चाय वाले
से।… ये भी पूछे कि ऐसा कोई रास्ता है जिससे
दिल्ली में घुसे बगैर हरयाणा या राजस्थान
की ओर निकला जा सके?
उनकी हरकतें मुझे संदिग्ध सी
लगीं, तो मैंने थोड़ा ध्यान से, और उचक कर, पास वाले
ट्रक के अंदर झाँक लिया। उसमें गाय, बैल और बछड़े भरे हुए थे।
और थोड़ा ध्यानपूर्वक देखने पर पता चला कि,… उन जानवरों के
आंसू, आँख से बह कर गले के नीचे तक एक
काली रेखा बना रहे थे।
तब तक एक ट्रक वाले लड़के ने मुझे, उधर झांकते देख लिया और
कड़क कर पूछा,.. “उधर क्या झाँक रहा है?”
मैंने घबरा कर कहा,… “ट्रक के पीछे
लिखी शायरी पढ़ रहा था।”
तब तक और कई लोग मेरे पास आ गए, और उस लड़के से
कहा,.. “इसको अगर छोड़ दिया तो ये फ़ोन करके हमें आगे पकड़वा
सकता है।”
उसने अपनी जेब से एक तमंचा निकाल कर, उसमें
गोली भरते हुए कहा,… “आज का दिन ही
खराब है, पीछे उस पुलिस वाले को मारना पड़ा, और अब
इसको मारना पड़ेगा, साथ ही चायवाले को
भी।… वैसे भी एक हत्या की
सजा फांसी है, और कई हत्या की
भी।” ऐसा कहते हुए उसने मुझे पर तमंचा तान दिया।
मैं वहां से भागना चाह रहा था, मैं प्रतिरोध भी करना
चाह रहा था, लेकिन मेरे पैर जैसे जाम हो गए, मेरे हाथ उठ
ही ना रहे थे। और तभी, एक जोरदार
फायर की आवाज के साथ, पिघला हुआ लोहा मेरे
सीने में समा गया।…
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. और मैं घबरा कर उठ बैठा,.. हाँ,.. शुक्र है कि मैं सपना देख
रहा था। मैं पसीने से तरबतर होते हुए सोच रहा था,
कि,.. ये गौ रक्षकों को आखिर मिलता क्या है, इस तरह
अपनी जान गवां कर गाय को बचाने की
कोशिश करने में? कोई उनकी सुरक्षा के लिए आगे
आता है क्या?.. और अगर गौ रक्षक अपने “बचाव” में एक दो को
मार दें तो ??

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