एक “खास” किस्म का किसान

जब किसानों के एकड़ों खेत चर डालने वाले एक वन्य पशु नीलगाय (हिरन की ही एक प्रजाति) को मारने का परमिट जारी हुआ तो वे फटाक से पर्यावरण-प्रेमी बन गए..!!

नीलगाय में उन्हें जगतजननी नजर आने लगी जिसे सीमित संख्या में मारने से भी प्रकृति का संतुलन उन्हें बिगड़ता नजर आने लगा. . . तब उन्हें लाचार किसान की आँखों का पानी एक बार भी नहीं नजर आया जिसकी महीनों की मेहनत पर नीलगाय रात के कुछ घंटों में ही पानी फेर देती थी…!!

फिर जब असली गायों की हत्या हुई और सरकार ने इस पर रोक लगाने का कानूनी उपक्रम किया, तो वे अचानक से सेक्युलर बन गए और उन्हें सस्ते प्रोटीन वाले मीट, चमड़े आदि का व्यापार प्रभावित होने, अर्थव्यवस्था के डोलने, और इस निकृष्ट व्यवसाय पर निर्भर एक संप्रदाय-विशेष के हितों की चिंता सताने लगी…!!

आने वाले दिनों के बारे में सोच कर वे गमगीन हो उठे, और वह गम गलत करने के लिए उन्होंने सरेआम गाय काटी, बीफ-फेस्ट आयोजित कर डाले.!!!

ताजा अपडेट यह है कि नीलगाय और गाय फिलहाल अप्रासंगिक हो गयी हैं, और अब उनकी चिंता के केंद्र में घूम कर “किसान” आ गया है .!!
एक “खास” किस्म का किसान, जो पुलिस पर हमला करता है, पुलिस की गाड़ियों और सवारियों-बच्चों समेत सिविल बसों को फूंक देने का कुत्सित प्रयास करता है, और अपने बचाव की कोशिशों में पुलिस जिसे मार गिराती है.…!!

मरने पर, जिनके अंत:वष्त्रों पर,

“अमूल-माचो-बड़े आराम से”……. की बजाय..

“कांग्रेस-देश तोड़ो-बड़े आराम से”…..का टैग लगा मिलता है..

सचमुच ये अलौकिक किसान है – हमने पहले कभी कहीं इनके बारे में नहीं सुना था…!!

Credit https://www.facebook.com/hardcoreindian/posts/1453185778072314

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