आग और राख

“आग और राख” के संबन्ध पर प्रकाश डालने का मेरा छोटा सा प्रयास अपने शब्दो के माध्यम् से-:

मानवीय ही नही अपितु विश्व के सभी जैवीय प्रजाति के लिये आग का महत्व है।कभी यही आग हमे पका भोजन देती है और इसी आग के जनित राख हमारे जूठे बर्तनों को स्वच्छ करती है।

शरीर आग मे समाहित होकर ही आत्मा आजाद कर फिर राख मे परिवर्तित कर गंगा मे प्रवाहित कर आत्मा को मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करती है।आग और राख के संबन्ध की इससे बड़ा उदाहरण और क्या हो सकता है।

आग हवन के रूप आरती के रूप में तो राख प्रसाद के रूप भभूत के रूप में परस्पर हमारे आध्यात्म के भाग बनते है।

जीवन/मृत्यु…भाई/बहन…पति/पत्नी…माता/पिता…जैसे ही पवित्र संबन्ध है आग/राख के।

“आग और राख” के संबन्धो पर प्रकाश डालने मे कोई अचूक गलती हो गयी हो मार्गदर्शित करियेगा आदरणीय….

Writer – मनीष हिंदू

Reference – Facebook 

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