शिष्य वही है जो अपने, गुरु का सदैव मान बढ़ाये

गुरु पुर्णिमा के अवसर विश्व समेत मेरे सभी गुरूजनों के सम्मान मेरे द्वारा रचित एक कविता-:

हम गीली मिट्टी है
गुरू एक कुम्हार
मिट्टी से घड़ा बना
जीवन दिया संवार,

वास्तविकता से आपने
ही परिचय करवाया
भला कौन बुरा क्या
इसका आभाष कराया,

आदि हो या अनंत हो
आप से है परिभाषित
आप के मार्ददर्शन से
ही विश्व मे है परिचित,

जीवन की मौलिकता
का आपने ज्ञान दिया
अनभिज्ञ उद्देश्यों को
आपने पहचान दिया,

माता का प्यार है आप
पिता सा है अभिमान
धरती पर आप है जैसे
अजर अमर भगवान,

शिष्य वही है जो अपने
गुरु का सदैव मान बढ़ाये
जैसे उपमा स्वयं सिमट
कर उपमान मे समायें,

#मनीष_की_कलम_से

Writer – मनीष
 

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