वो मिट्टी का घरौंदा झट से बिखर गया

#प्रद्युम्न_की_याद_में_मेरे_द्वारा_मेरे_द्वारा_रचित_छोटा_सा_भाव-:

वो मिट्टी का घरौंदा झट से बिखर गया

वो मां का दिल था खौफ से शिहर गया

सुबह जब स्कूल से आई सहमी सी खबर

और पिता से बोला कि प्रद्युम्न भगवान के घर गया,

रौंद दिया बचपन को उसके रेत दिया अरमान

फांसी दो अब हत्यारे को हम सबकी है फरमान

मिट्टी के इस शरीर को नोच रहा है कैसे इंसान

मिट्टी के मुरत में देखो कैसे बैठ गया अब हैवान,,

न्याय की आस मे यें आखें फिर नही पथरायेगी

कोई मां न्याय के लिये फिर आंचल कैसे फैलायेगी

पिता की भावना है वो एक दिन संभल जायेगी

छोटी सी वो बहना राखी के लड्डु किसे खिलायेगी

मनीष

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