ग्राउंड पर क्रिकेट मैच भी चल रहा था

#नकलची
परसों सुबह पार्क में गया तो वहाँ बड़े से ग्राउंड पर क्रिकेट मैच भी चल रहा था . बाकि सब तो ठीक था लेकिन मेरा ध्यान एक लड़के पर गया जिसने ना सिर्फ ‘हेयर स्टाइल’ और ‘शेव’ विराट कोहली की कॉपी की हुई थी , उसका चलने का , भागने का और बेटिंग- बॉलिंग करने का तरीका भी बिल्कुल विराट की तरह था . ये अलग बात है कि उसकी बॉलिंग की पिटाई भी हो रही थी और ना उससे फील्डिंग हो रही थी और ना ही बैटिंग. ये सब देखकर सिर्फ हँसी ही आ रही थी कि नकल करने में भी अक्ल और टेलेंट की जरूरत होती है .. नही तो नकल करके सिर्फ बेइज्जती ही मिलती है .

अटलजी की भाषण शैली का कौन मुरीद नही होगा ? वो उनकी अपनी ‘यूनिक स्टाइल’ थी बोलने की . वो जब भी ‘पोज’ लेते थे उसके बाद कोई धमाकेदार बात ही बोलते थे . उनके ओजस्वी भाषण के पीछे उनकी राजनीतिक समझ , हास्य बोध और नॉलेज का हाथ था .. सिर्फ स्टाइल नही . माधवराव सिंधिया भाषण देते समय अटलजी की कॉपी करते थे . वैसे ही pause देते थे लेकिन उन पर कोई अटलजी की तरह लट्टू नही होता था . उनका बेटा ज्योतिरादित्य भी उनकी नकल करता है मतलब अटलजी की नकल करता है .. लेकिन उन्हें ये ही नही पता होता कि बात में तथ्य भी है या नही .

प्रमोद महाजन कितने कुशल और चतुर नेता थे ये सबको पता है . संकट मोचक थे NDA सरकार के . सरकार उनकी ही मर्जी सी चल रही थी.नॉलेज भी बहुत था और सेंस ऑफ ह्यूमर भी उनको गजब का था लेकिन भाषण में नकल अटलजी की करते थे .. हुबहू .. इसलिए उनका भाषण देखकर हँसी भी आती थी . राजनाथ सिंह भी बहुत हद तक अटलजी की नकल करते है .. लेकिन असल .. असल होता है . इनमें से कोई भी अटलजी नही बन पाया .

किरण कुमार अपनी शुरू में मिली फिल्मों में हीरो हुआ करते थे . लेकिन उन्होनें जमकर राजेश खन्ना की नकल की . फ्रेम दर फ्रेम . लोगों ने रिजेक्ट कर दिया तो गुजराती फिल्मों में चल गये . वहाँ अमिताभ की नकल की. 15 साल बाद राकेश रोशन ने खुदगर्ज में उन्हें विलेन का रोल दिया . उसमें उनहोने किसी की नकल नही की और चल गये . उसके बाद तेज़ाब और खुदा गवाह ने उन्हें बड़ा खलनायक बना दिया .. लेकिन नाम मिला तभी जब नकल करना बंद किया .

दिलीप कुमार के बाद आने वाला कोई भी अभिनेता उनके प्रभाव से नही बच पाया . राजेन्द्र कुमार और मनोज कुमार ने शुरुआत दिलीप कुमार की नकल से ही की . मनोज कुमार ने तो बाद में अपनी अलग स्टाइल बना भी ली लेकिन दर्जनों सिल्वर जुबली फिल्में देने वाले जुबली कुमार यानि राजेन्द्र कुमार ने जिंदगी भर दिलीप कुमार की नकल की . मेहमूद तो राजेन्द्र कुमार को उनके मुँह पर भी ‘नकली दिलीप कुमार’ बोलते थे . अमिताभ भी जो एक हाथ कमर पर रखकर बोलते है वो भी दिलीप कुमार का ही स्टाइल है और अमिताभ खुद ये मान चुके है कि उनके शराब पीकर एक्टिंग करने वाले सीन पर दिलीप कुमार का असर होता था लेकिन प्रभावित होना और फोटोकॉपी करना दो अलग मुद्दे है इसलिये मनोज कुमार और अमिताभ पर कभी ऊँगली नही उठी लेकिन सुपरहिट फिल्मों की मशीन राजेन्द्र कुमार को अभिनेता के तौर पर इज्जत नही मिल पायी क्योँकि वो घोर नकलची थे .

कुछ महीनों से देख रहा हूँ कि फेसबुक पर भी अच्छा और ओरिजिनल लिखने वाले कुछ लेखक अपनी खुद की यूनिक स्टाइल छोड़कर नकल पर उतर आये है. उन्हें ये सब बंदकर अपनी स्टाइल में वापस आना चाहिये क्योँकि राजेन्द्र कुमार को पीठ पीछे सभी लोग हँसते थे . बाकि जिसकी जो मर्जी .
Ashish Retarekar

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