“Cancer” एक भयानक,डरावना सा शब्द जो सबको हिला देता है।

कविता उन सभी केंन्सर मरीजों के लिये समर्पित जो लड़कर आगे आये एवं धन्यवाद उन सभी चिकित्सकों को जिन्होंने नवजीवन दिया।
CBCC के स्पर्श कार्यक्रम में प्रस्तुत मेरी रचना।
“Cancer” एक भयानक,डरावना सा शब्द जो सबको हिला देता है।
हर कोई जब सुनता हैं,बस स्तबध हो जाता है।
बीमारी सुनकर उस घर में कोई सों नही पाता है।
एक बोझ सा सबके दिल पर होता हैं, चिन्ता होती है।
उस परिवार के सदस्यो कि हर आँख आंसु रोती हैं।
एक अनजान सा भय,उन सबके दिलो को सताता है।
क्या होगा, कोई भी उस घर में सहज नही हो पाता है।
कैसे बताए उस मरीज को सबको यहीं दर्द सताता है।
मरीज तो सुनकर अपने में जीते जी ही मर जाता है।
उसके बचे जीवन के सारे सपने चूर चूर हो जाते हैं।
सिर्फ़ अस्पताल के चक्कर व डा.के चेहरे नजर आते है।
फिर मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे,चर्च, सब दर घुमे जाते है।
सबकी बताई दवा एवं नुस्खे भी आजमा लिये जाते हैं।
तन,मन,धन व परेशानी से हर परीवार लूट सा जाता हैं।
एक अच्छा खासा इसान,इसके इलाज से टूट जाता है।
पर धन्य है ईश्वर जिसने विज्ञान व कुशल चिकित्सकों,
के द्वारा इसके इलाज को आसान सा बना डाला।
कई मरीजो को जीवन देकर,जीवन रोशन कर डाला!
धन्य है वो सब डाक्टर्स व धन्य उनके सब सहयोगी है।
जिनके अथक प्रयासो से ठीक हो जी रहे लाखो रोगी है।
किसी ने भगवान को नहीं देखा, इन्हे ही भगवान कहते हैं।
सुख देते हैं कई जीवन को,तो कइयो के दर्द को सहते है।
सबकी दुआ है इन सभी को,इनका जीवन खुशहाल रहे।
करते रहे यू ही सेवा सुश्रुसा ,ईश्वर इन पर मेहरबान रहे।
शब्दों की भेट देता हैं ” जनार्दन सबको मुस्कुराहट देने वालो
आपके जीवम में भी खुशयो का बागबान रहे।
लेखक।
जनार्दन शर्मा

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