रॉफेलनामा by Ashish Retarekar

#रॉफेलनामा
सुबह फलवाले के पास सेब 160 रुपये किलो थे । मैंने भाव करके 140 में ले लिये । सफेद कुर्ता पायजामा पहने मर्सिडिज से उतरे दूसरे कस्टमर ने पूछा .. क्या रेट लिये सेब ? मैंने बोला 140 । उसने मुझे समझाया कि ..’ यही फलवाला चार दिन पहले यही सेब 70 रुपये किलो में बेच रहा था । हम खरीदने भी वाले थे लेकिन मम्मा डिसाइड ही नही कर पायी । इसका मतलब या तो आप ठगे गये या आप 70 वाले का रेट 140 बता रहे हो .. मतलब आप भ्रष्टाचारी हो !

फलवाला भी उसको समझा चुका है कि ..70 रुपये वाला भी था लेकिन उसमें दाग लगे हुए थे .. ये किन्नूर का फ्रेश सेब है लेकिन वो किसी की सुनने को ही तैयार नही है .. अपनी गाड़ी की छत पर चढ़कर ‘चोर- चोर’ चिल्ला रहा है । मेरे पास में खड़े बुजुर्ग और उनके समझदार से दिख रहे युवा बेटे ने कहा .. आप उधर ध्यान ही मत दो .. ये तो पागल है .. आप अपने काम में लगे रहो 😊

एक दिन कनॉट प्लेस पर भी मैंने खुलकर भ्रष्टाचार किया था …मोदी जैसा भ्रष्टाचार ! ऑटो वाला कनॉट प्लेस से पश्चिम विहार के 200 रुपये माँग रहा था …मैंने कैब कर ली । 240 रुपये लगे ।

दो-तीन साल पहले की बात है । कम्पनी में हजारों मीटर रेक्जिन हर महीने आता है । एक रोल 25 या 30 मीटर का होता है । ‘परचेस’ में एक नया बंदा आया । उसने दो महीने बाद ही पार्टी बदल दी । किसी नये सप्लायर से मटेरियल मंगवाने लगा । परचेस में जो पुराने खुर्राट बुजुर्ग थे वो पहुँच गये मालिक के पास । मैं जो कपड़ा 88/- रुपये मीटर मँगवा रहा था .. वही अब 93 रुपये मीटर आ रहा है .. आपको पता है ? इसने ऑर्डर करने से पहले आपसे पूछा था ? ये नया बंदा तो कम्पनी का भट्टा बैठा देगा ! !

एमडी ने उसको जवाब दिया .. ‘ऐसा है कि इन दो महीनों में उसी नये लड़के ने मुझे बताया है कि एक बार में जो 100 या 150 रोल आते है उनमें से सिर्फ 10 % रोल में ही उतने मीटर रेक्जिन होता है जितने का उसपर स्टीकर लगा होता है .. बाकि सब में 2 या 2.50 मीटर कपड़ा कम होता है । थिकनेस भी सभी रोल की 1.4 mm नही होती .. अधिकतर 1.3 mm ही होता है .. इसका मतलब ये रेक्जिन पहले भी मुझे 97-98 रुपये मीटर ही पड़ रहा था .. तुम्हारे और सप्लायर की मिलीभगत से । अब मुझे 94 रुपये में उससे बेहतर क्वालिटी का कपड़ा मिल रहा है । तुमने कम्पनी को चुना लगाया और उसने कम्पनी का हित सोचा .. भट्टा आप बैठा रहे थे .. वो नही । 30 के बाद आप अपना हिसाब ले जाना ।
Ashish Retarekar

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