जीवन का जादुई अमृत?

“हम अपने शरीर को संतुष्ट करने के लिए जो कर सकते हैं, उसकी सीमाएं होती हैं। हम एक बार में भोजन की सीमित मात्रा ही खा सकते हैं। हम कितना पी सकते हैं, उसकी भी एक सीमा होती है। बहरहाल, दूसरों की सेवा करने की क्षमता असीमित होती है। जो लोग संसार में सबसे खुश रहते हैं, वे वही लोग हैं, जो दूसरों की खातिर चीजें कर रहे हैं।”

आपकी यात्रा में आपके साथ कुछ विराट घटित होता है। आप एक रुपांतरण से गुजरते हैं और उस रुपांतरण से आप यात्रा में एक और कदम उठाने के लिए प्रेरित होते हैं। यह आखिरी कदम है। इस आखिरी कदम को उठाकर आप सच्चे हीरो बन जाते हैं और आपकी की यात्रा पूरी हो जाती है।

आप में अपना सपना साकार करने के लिए जोश की जो आग थी, वह करुणा की आग में रुपांतरित हो जाती है और एक तरह से आप उन लोगों की मदद करने के लिए घर लौट आते हैं, जो उतने ही सुविधाहीन हैं, जितने कि कभी आप थे। आप उनकी निराशा की भावना जानते हैं, क्योंकि आपने उन सबका अनुभव किया था। और आपको अंतर्मन की गहराई से आवाज आती है कि आपने राह में जो कुछ भी हासिल किया है, उसके साथ आप जितने ज्यादा लोगों की मदद कर सकते हों, उन्हें प्रेरित कर सकते हों, उतना करें; पर वह चीज करें, जो आप कर सकते हैं; जो भी संसाधन आपके पास हों, उनका इस्तेमाल करें।

“दो स्थान होते हैं, जहां आप अटक जाते हैं। एक तो तब, जब रोमांचक यात्रा का बुलावा आता है, जिसमें हर इंसान अस्वीकार करने के दौर से गुजरता है। यह बात सब जानते हैं। जो बात लोगों को ज्यादा मालूम नहीं है, वह है लौटने की अस्वीकृति। जब अपने पुरस्कार हासिल कर लिया हो, लेकिन आप इतने आनंद तथा भारी खुशी में होते हैं कि लौटना ही नहीं चाहते। मगर यात्रा तब तक पूरी नहीं होती, जब तक कि आप जीवन के उस अमृत को ग्रहण नहीं करते हैं और अपनी जन्मभूमि में लौटकर उसे दूसरों को बांटते नहीं हैं। आपको जो चीज हीरो बनाती है, वह यह है कि यह कोई स्वार्थपूर्ण यात्रा नहीं है। आप ऐसे व्यक्ति हैं, जिसने अपने जीवन को खुद से ज्यादा बड़ी किसी चीज के आधार पर बनाया है।”

“जब हम मूलतः खुद के और आत्म-संरक्षण के बारे में सोचना छोड़ देते हैं, तब हम चेतना के सचमुच वीरतापूर्ण रुपांतरण से गुजरते हैं।”

आपने कितनी भी सफलताएं, कितने भी पुरस्कार हासिल किए हों, जह आपसे ज्यादा बड़ा कोई स्वप्न आपके दिल को जकड़ता है, तभी भीतर का हीरो प्रकट होता है। आप उसे बांटने के लिए प्रेरित होते हैं, जिसे “जीवन का जादुई अमृत” कहा गया है — आपने यात्रा में जो हर चीज सीखी थी — ताकि आप अधिक से अधिक लोगों के जीवन में फर्क डाल सकें।

जब आप अपनी यात्रा पूरी कर लेते हैं, तो आप जानते हैं कि जिन लोगों ने आपकी मदद की थी, उनके समर्थन के बिना आप कभी अपने सपने को हासिल नहीं कर पाते। आपको जो मिला है, उसके प्रति सबसे गहरी कृतज्ञता और संघर्षरत लोगों के प्रति सबसे गहरी करुणा की वजह से आप खुद को देने और दूसरों के जीवन में फर्क डालने से रोक नहीं सकते। आप करुणा की तपिश महसूस करते हैं, वह इतनी बड़ी होती है कि आप चाहे जो कर लें, आप चाहे जितना दे दें, आप उससे भी ज्यादा देना चाहते हैं।

“अगर आपके पास बहुत सारी दौलत है और यह बैंक में पड़ी हुई कुछ नहीं कर रही है, तो यह संभावना की बर्बादी जैसा महसूस होता है। आपको इसे किन्हीं कामों में लगाना चाहिए। लोगों की मदद करना और उन्हें सहारा देना अच्छा महसूस होता है। उन्हें उनके सपने पूरे करते देखना और ज्यादा खुश जिंदगी जीते हुए देखने में अच्छा महसूस होता है।”

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