अंत यहीं कर देना मेरा सौभाग्य होगा

“लड़का बहुत अच्छा है मालती! अगर उसको हमारी छोटी बेटी स्वेता ही पसंद है तो छोटी की शादी ठीक कर देते हैं।”

“हा वैसे भी 2 साल ही तो छोटी है स्वेता। उसके बाद ही संगीता का कर देंगे।”
“तुम स्वेता को लेकर हॉल में पहुँचो, वे लोग इन्तेजार करते होंगे! ”

स्वेता ने एकबार संगीता की तरफ देखा और फिर अपनी माँ के साथ हॉल में चली गई
“जी आ गई हमारी छोटी बेटी! नमस्ते कर बेटा, हमारी स्वेता सुंदर भी है और पढ़ीलिखी भी”
स्वेता के पिता ने परिचय देते हुए कहा।

“सुंदर और पढ़ीलिखी तो संगीता दी भी हैं! फिर आपलोगों ने मुझे क्यूँ?”

स्वेता के मन में पता नही क्या चल रहा था। उसने सवाल अपनी आँखों से लड़के की तरफ भी किया

“जी बिलकुल वो भी सुंदर लगी थी ..मगर आपको देखा तो..आप ज्यादा सुंदर हैं उनसे, इसलिए हमलोगों ने ..!”

“अरे ये तो हमारी स्वेता का सौभाग्य है कि आपने ..!” स्वेता के पिता रिश्ते को आगे बढ़ाना चाहते थे

“नहीं पापा ये हमारी संगीता दी का सौभाग्य है कि उनका रिश्ता इनसे नही हो रहा और मैं भी खुद का दुर्भाग्य नहीं लिखना चाहती”
“ये तू क्या बोल रही है बेटा?”

“पापा इन्हें संगीता दी से सुंदर मैं लगी..कल मुझसे सुंदर कोई और लगेगी! बाहरी सुंदरता का तो कोई अंत ही नहीं है इसलिए इस रिश्ते का अंत यहीं कर देना मेरा सौभाग्य होगा!”

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