उन्होंने इस कट्टरता को काफी पहले ही भाप लिया

पिछले चार वर्षों में हर जाति का खुन उबाल मारा है …

सबने अपने अपने महानायकों का बंटवारा कर लिया है …

यहाँ तक की भगवान को भी नहीं छोड़ा …

कोई भी अपनी जाति के खिलाफ कुछ भी सुनने को तैयार नहीं … सब चीर दूँगा फाड़ दूँगा वाली मुद्रा में है …

हर किसी के मन में अपनी जाति को महान बताने की सनक आयी हुई है …

ऐसे में मेरे एक मित्र हैं … बनिया हैं … उनकी कपड़े की दुकान है … उन्होंने इस कट्टरता को काफी पहले ही भाप लिया … तो उनके दिमाग में आइडीया आया …

अब उन्होंने अपनी दुकान के आगे बहुत सी T-Shirts टाँग दी .. जिसपर “मैं राजपूत …मैं गुज्जर ..मैं जाट … मैं ब्राह्मण … मैं कट्टर हिन्दू … मैं सुन्नी … हम इमान वाले … जय भीम… खालसा ” यह सब लिखा था …

दुकान के बाकी कपड़ों की बिक्री एक तरफ और इन T – shirts एक तरफ …

यह सब देख मैंने पुछा कि भाई हर जाति .. हर धर्म के लिये T – Shirts है .. लेकिन “मैं बनिया” नाम की कोई T – Shirt क्यूँ नहीं है …

तो उसने कहा … ” हम बनिया हैं … धंधा करते हैं .. 

Reference – Abhinav Pandey

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