जामुन का पेड़

 

जंगल के बीचो बीच जामुन का एक बहुत पुराना वृक्ष था। पीढ़ियों से गिलहरियों का एक परिवार उस वृक्ष पर रहता आ रहा था।

वह वृक्ष उन्हें हर वो चीज देता आ रहा था जो जीने के लिए ज़रूरी थी। खाने के लिए फल, रहने के लिए अपने खोखले तनों में आसरा और खतरनाक पक्षियों और जानवरों से सुरक्षा। यही वजह थी कि आज तक गिलहरियों के कुनबे में से किसी ने कहीं और जाने की नहीं सोची थी।

लेकिन अब परिस्थितियां बदल रहीं थीं। हर चीज जो शुरू हुई है वो ख़त्म भी होती है। अब जामुन के पेड़ का भी अंत निकट था।उसकी मजबूत जडें अब ढीली पड़ने लगी थीं। जामुन के फलों से लदे रहने वाले उसे पेड़ पर अब मुश्किल से ही जामुन खाने को मिल रहे थे।

यह एक आपात स्थिति थी और गिलहरी परिवार ज्यादा दिनों तक इसकी अनदेखी नहीं कर सकता था। अंततः एक मीटिंग बुलाई गयी।

सबसे बुजुर्ग होने के कारण अकड़ू गिलहरी ने मीटिंग की अध्यक्षता की और अपनी बात रखते हुए कहा, “मित्रों ये पेड़ ही हमारी दुनिया है। यही हमारा अन्न दाता है। इसने सदियों से हमारे पूर्वजों का पेट पाला है। हमारी रक्षा की है। आज भले ही इस पर फल आने कम हो गये हैं। इसकी जडें कमजोर पड़ गयी हैं, फिर भी यह हम सबको आश्रय देने के लिए पर्याप्त है और भगवान की कृपा हुई तो क्या पता ये कुछ दिनों में ये वापस ठीक हो जाए? अतः हम सबको यहीं रहना चाहिए और ईश्वर की प्रार्थना करनी चाहिए।”

सभी गिलहरियों ने अकड़ू की हाँ में हाँ मिलायी लेकिन गिल्लू गिलहरी से रहा नहीं गया और उसने हाथ उठाते हुए कहा, “मुझे कुछ कहना है।”

“क्या कहना है? हम भी तो सुनें”, अकड़ू कुछ अकड़ते हुए बोला।

“क्यों न हम एक नया पेड़ तलाशें और अपना परिवार वहीँ ले चलें, क्योंकि इस पेड़ का अंत निकट है, हो सकता है हम कुछ महीने और यहाँ काट लें,पर उसके बाद क्या? हमें कभी न कभी तो इस पेड़ को छोड़ना ही होगा।”

“बेकार की बात करना छोडो गिल्लू! नए खून के जोश में तुम ये भूल रहे हो कि इस पेड़ के बाहर कितना खतरा है,जो कोई भी यहाँ से जाने की सोचेगा उसे बाज, लोमड़ी या कोई अन्य जानवर मार कर खा जाएगा। और भगवान पर भरोसा भी तो कोई चीज होती है ।”, अकड़ू ने ऊँची आवाज़ में गिल्लू को समझाया।

“चाचा, खतरा कहाँ नहीं है। सच कहूँ तो इस समय नया घर खोजने का खतरा ना उठाना ही हमारे परिवार के लिए सबसे खतरनाक चीज है। और जहाँ तक भगवान पर भरोसे की बात है तो अगर हम उस पर इस मरते हुए पेड़ में जान डालने का भरोसा कर सकते हैं तो नया घर खोजते वक़्त हमारी जान की रक्षा करने का भरोसा क्यों नहीं दिखा सकते।आप लोगों को जो करना है करिए मैं तो चला नया घर ढूँढने।”, और ऐसा कहते हुए गिल्लू जामुन का पेड़ छोड़ कर चला गया।

गिल्लू के जाने के कई दिनों बाद तक उसकी कोई खबर नहीं आई। इस पर अकड़ू सबको यही कहता फिरता, “मैंने मना किया था,बाहर जान का खतरा है, पर वो सुनता तब तो , मारा गया बेकार में।”

बाकी गिलहरियाँ अकड़ू की बात सुनतीं पर समय के साथ-साथ उस धराशायी हो रहे पेड़ पर रहना मुश्किल होता जा रहा था। इसलिए गिलहरी परिवार ने एक और मीटिंग बुलाई। इस बार परिवार दो हिस्सों में बंट गया कुछ गिलहरियाँ गिल्लू की राह पर चलते हुए खतरा उठाने को तैयार हो गयीं और बाकी सभी अकड़ू की राह पर चलते हुए कोई खतरा नहीं उठाना चाहती थीं।

कुछ एक महीने और बीते, जामुन के पेड़ पर फल गायब हो चुके थे। उस पर रह रही गिलहरियाँ बिलकुल कमजोर हो चुकी थीं और अब उनमे कुछ नया करने की हिम्मत भी नहीं बची थी। धीरे-धीरे अकड़ू और बाकी गिलहरियाँ मरने लगीं और वहां से करीब 100 मीटर की दूरी पर गिल्लू और बाकी गिलहरियाँ एक दुसरे जामुन के पेड़ पर हंसी-ख़ुशी अपना जीवन जी रही थीं।

*यही हमारे जीवन में घटित हो रहा है।*

हम जिस भी कार्यक्षेत्र में हैं में हैं, वह धीरे-धीरे प्रचलन से बाहर हो रहा है या उसे करने का तरीका तेजी से बदल रहा है। हम अपने कौशल का उन्नयन नहीं करते या अपने कौशल को नहीं तरासते तो हमारी काम करने की दक्षता कम होती जाती है।
तेजी से बदलती इस दुनिया में प्रतिदिन नयी नयी तकनीकें विकसित हो रही हैं। इसलिए हमें खुद को बदलाव के लिए तैयार रखना चाहिए।

यदि हम अपने अन्दर कोई नया कौशल नहीं सीखते, अपना ज्ञान बढ़ाने के लिए कोई किताब नहीं पढ़ते, कोई प्रशिक्षण नहीं लेते, तो धीरे धीरे आप उस संस्थान के लिए अनुपयोगी हो जाते हैं और जब आपकी छटनी हो जाती है तो आप दूसरों को दोष देते हैं , जबकि अपनी इस हालत के लिए आप स्वयं जिम्मेदार हैं।

अपनी काबिलियत, अपनी ताकत को जिंदा रखिये। अपने कौशल, अपने हुनर को और तराशिये। उसपर धूल मत जमने दीजिये।

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