इस बार होली की तारीख को लेकर लोगों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है। कोई 3 मार्च कह रहा है तो कोई 4 मार्च। सोशल मीडिया, अलग-अलग पंचांग और ग्रह-नक्षत्रों की गणना के कारण भ्रम और बढ़ गया है। ऐसे में यह जानना आवश्यक हो जाता है कि होलिका दहन कब होगा और रंगों वाली होली किस दिन मनाना शास्त्रसम्मत रहेगा।
यह लेख आपको पूर्णिमा तिथि, भद्रा काल, प्रदोष काल, सूतक काल और चंद्र ग्रहण के प्रभाव के आधार पर पूरी स्पष्ट जानकारी देगा।

होली 2026 का धार्मिक महत्व
हिंदू परंपरा में होली केवल रंगों का त्योहार नहीं है, बल्कि यह अधर्म पर धर्म की विजय, भक्ति की शक्ति और सामाजिक सौहार्द का प्रतीक है।
फाल्गुन मास की शुक्ल पूर्णिमा को मनाया जाने वाला यह पर्व:
- नकारात्मक ऊर्जा के दहन का प्रतीक है
- मन की अशुद्धियों को त्यागने का संदेश देता है
- रिश्तों में मिठास और भाईचारे को मजबूत करता है
- नई ऋतु और नई शुरुआत का संकेत देता है
होली के दो प्रमुख भाग होते हैं:
- होलिका दहन (अग्नि पूजन)
- रंगवाली होली (धुलेंडी)
होलिका दहन कब है? (Holika Dahan 2026 Date & Timing)
पूर्णिमा तिथि
- फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 2 मार्च शाम 5:55 बजे
- पूर्णिमा तिथि समाप्त: 3 मार्च शाम 5:07 बजे
पूर्णिमा के साथ ही इस दिन भद्रा काल भी लग रहा है। शास्त्रों के अनुसार, भद्रा काल में होलिका दहन वर्जित माना जाता है।
शुभ मुहूर्त
भद्रा रहित, प्रदोष व्यापिनी पूर्णिमा को होलिका दहन करना श्रेष्ठ माना गया है।
- होलिका दहन की तिथि: 3 मार्च 2026, मंगलवार
- शुभ समय: शाम 06:22 बजे से रात 08:50 बजे तक
- कुल अवधि: 2 घंटे 28 मिनट
यही समय शास्त्रसम्मत और शुभ माना जा रहा है।
3 मार्च या 4 मार्च – रंगवाली होली कब मनाएं?
सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि रंगों वाली होली किस दिन खेली जाए।
पंचांग के अनुसार इस वर्ष अधिकमास और तिथि परिवर्तन के कारण भ्रम की स्थिति बनी है।
हालांकि धार्मिक गणना के अनुसार:
- होलिका दहन 3 मार्च को होगा
- रंगों वाली होली 4 मार्च 2026 को मनाई जाएगी
अलग-अलग पंचांगों में समय के सूक्ष्म अंतर के कारण भ्रम पैदा हुआ, लेकिन शास्त्रीय मत के अनुसार 4 मार्च को ही धुलेंडी मान्य है।
चंद्र ग्रहण का प्रभाव – क्या है पूरी स्थिति?
इस बार होली से ठीक पहले साल का पहला चंद्र ग्रहण भी पड़ रहा है, जिससे भ्रम और बढ़ गया है।

चंद्र ग्रहण 2026 का समय
- प्रारंभ: 3 मार्च दोपहर 3:20 बजे
- समाप्ति: शाम 6:47 बजे
सूतक काल
ग्रहण से लगभग 9 घंटे पहले सूतक काल शुरू हो जाता है।
सूतक काल में:
शुभ कार्य नहीं किए जाते
पूजा-पाठ वर्जित माना जाता है
धार्मिक उत्सव टाल दिए जाते हैं
इसी कारण 3 मार्च को रंग खेलने की बजाय 4 मार्च को होली मनाना शास्त्रसम्मत माना गया है।
भद्रा काल क्या है और इसका महत्व
भद्रा काल को शुभ कार्यों के लिए अशुभ माना जाता है। होलिका दहन जैसे अग्नि संबंधित अनुष्ठान भद्रा रहित समय में ही किए जाते हैं।
भद्रा का संबंध ज्योतिष में शनि से माना जाता है और इसे उग्र ऊर्जा का प्रतीक समझा जाता है। इसलिए:
- भद्रा में विवाह, दहन, मांगलिक कार्य वर्जित
- भद्रा समाप्ति के बाद प्रदोष काल में होलिका दहन श्रेष्ठ
होलिका दहन का आध्यात्मिक अर्थ
होलिका दहन केवल लकड़ी जलाना नहीं है। इसका गहरा आध्यात्मिक अर्थ है।
- अहंकार का दहन
- ईर्ष्या और द्वेष का त्याग
- नकारात्मक ऊर्जा का अंत
- भक्त प्रह्लाद की अटूट भक्ति का सम्मान
यह हमें सिखाता है कि सच्ची आस्था और सकारात्मकता अंततः विजयी होती है।
रंगवाली होली का महत्व
4 मार्च 2026 को मनाई जाने वाली धुलेंडी का विशेष महत्व है।
- सामाजिक मेलजोल
- रिश्तों में मधुरता
- पुरानी कटुता का अंत
- नई शुरुआत
रंग केवल चेहरे पर नहीं, बल्कि मन पर भी चढ़ते हैं।
होली 2026 से जुड़े प्रमुख प्रश्न (AEO Section)
होली 2026 कब है?
रंगों वाली होली 4 मार्च 2026 को मनाई जाएगी।
होलिका दहन कब होगा?
3 मार्च 2026 को शाम 6:22 से 8:50 बजे तक।
क्या 3 मार्च को होली खेल सकते हैं?
नहीं, क्योंकि उस दिन चंद्र ग्रहण और सूतक काल का प्रभाव रहेगा।
क्या चंद्र ग्रहण का असर होली पर पड़ेगा?
हाँ, ग्रहण के कारण 3 मार्च को उत्सव वर्जित रहेगा, इसलिए 4 मार्च को होली मनाना उचित है।
ग्रह-नक्षत्रों का प्रभाव
इस वर्ष होली पूर्णिमा के साथ ग्रहों की विशेष स्थिति बन रही है। ग्रहण का योग और अधिकमास के कारण तिथि गणना में अंतर देखने को मिला।
ज्योतिषीय दृष्टि से यह समय:
- आत्मचिंतन
- नकारात्मक विचारों से मुक्ति
- सकारात्मक संकल्प लेने के लिए उपयुक्त
होली 2026 में क्या करें?
- होलिका दहन में परिवार सहित शामिल हों
- अग्नि में गेहूं की बालियां अर्पित करें
- बुराइयों को त्यागने का संकल्प लें
- प्राकृतिक रंगों से होली खेलें
- बुजुर्गों का आशीर्वाद लें
होली 2026 में क्या न करें?
- सूतक काल में शुभ कार्य न करें
- रासायनिक रंगों का प्रयोग न करें
- अनावश्यक विवाद से बचें
- किसी की भावना आहत न करें
निष्कर्ष
होली 2026 को लेकर बना भ्रम अब पूरी तरह स्पष्ट है।
- होलिका दहन: 3 मार्च 2026
- रंगवाली होली: 4 मार्च 2026
- चंद्र ग्रहण: 3 मार्च
- सूतक काल के कारण 3 मार्च को रंग न खेलें
होली केवल तिथि नहीं, एक भाव है। यह हमें सिखाती है कि जीवन में नकारात्मकता को जलाकर प्रेम, सौहार्द और विश्वास के रंग भरने चाहिए।
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