कोरोना के मरीज को जैसे “ऑक्सीजन” मिल गई

अभी रफाल का भूत उतरा नहीं, स्टेन स्वामी का और चढ़ गया – संसद सत्र बर्बाद हुए समझो – राहुल गाँधी और उसके “चपरासी” शागिर्दों को बस रफाल के लिए बोलने वाला दुनियां में कोई मिल जाये, बस उन्हें लगता है कोरोना के मरीज को जैसे “ऑक्सीजन” मिल गई — सारे आरोप भारत के सुप्रीम … Read more

पलटीबाज बालक

माँ मुझे जोर से भूख लगी है..खाना क्यों नही दे रही हो ? माँ :- अरे सुबह ही तूने बोला की आज मेरा उपवास है.. मैं कुछ नही खाऊंगा । सुबह की बात छोड़ो.. अब भूख लगी है और सब्जी फिकी मत बनाना , मिर्च तेज कर देना । माँ :- बेटा खाना लग गया … Read more

जब दुनिया में आपदा आयी थी तो केन्या ने कुछ नही किया

केन्या के पास मेडिकल ऑक्सीजन नही थी, रेमेडेसिविर इंजेक्शन नही थे … अनाज था … उसने अनाज ही भेज दिया । वजह सिर्फ ये थे कि इस मुश्किल घड़ी में वो भारत के साथ खड़ा रहना चाहता था… ऑक्सीजन नही तो अनाज ही सही । कल को जब इतिहास लिखा जायेगा तो कोई ये तो … Read more

देश की मौजूदा हालत को समर्पित

एक दो बड़े झटकों के साथ तेज रफ़्तार बस रुक गयी सभी यात्री ड्राइवर पर भड़कने लगे ! पर जब पसीना पसीना ड्राइवर ने बताया कि ब्रेक फेल हो गए थे, एक किलोमीटर पहले किसी तरह सँभालते हुए यहाँ पर रोकना ठीक लगा और ……सब बच गए ! तो सब ड्राइवर की भूरी भूरी प्रशंसा … Read more

एक सुबह होगी 😊😊

जब लोगों के कंधों पर ऑक्सीजन सिलेंडर नहीं दफ्तर का बैग होगा, गली में एंबुलेंस नहीं स्कूल की वैन होगी, और भीड़ दवाखानो पर नहीं चाय की दुकानों पर होगी, *एक सुबह होगी ❤❤* जब पेपर के साथ पापा को काढ़ा नहीं चाय मिलेगी, दादाजी बाहर निकल कर बेखौफ पार्क में गोते लगाएंगे, और दादी … Read more

समस्याओं का बोझ

एक प्रोफेसर कक्षा में दाखिल हुए। उनके हाथ में पानी से भरा एक गिलास था। उन्होंने उसे बच्चों को दिखाते हुए पूछा, “यह क्या है?” छात्रों ने उत्तर दिया, “गिलास।” प्रोफेसर ने दोबारा पूछा, “इसका वजन कितना होगा ?” उत्तर मिला, “लगभग 100-150 ग्राम।” उन्होंने फिर पूछा, “अगर मैं इसे थोड़ी देर ऐसे ही पकड़े … Read more

संसार में दो प्रकार के पेड़ पौधे होते हैं…

संसार में दो प्रकार के पेड़ पौधे होते हैं… प्रथम – अपना फल स्वयं दे देते हैं… जैसे – आम, अमरुद, केला इत्यादि । द्वितीय – अपना फल छिपाकर रखते हैं… जैसे – आलू, अदरक, प्याज इत्यादि । जो फल अपने आप दे देते हैं, उन वृक्षों को सभी खाद-पानी देकर सुरक्षित रखते हैं, और … Read more

क्या लिखूँॽ कैसे लिखूं ? किस तरह लिखूं?

  _सोचता हूँ कि क्या लिखूँॽ कैसे लिखूं ?और फिर किस तरह लिखूं?_ वैसे सोचने को बहुत कुछ है, परन्तु आज के भौतिकता प्रधान युग में भला आदमी अपनी रोजी रोटी के अलावा कुछ कहाँ सोचता हैॽ सोच की सारी परिधि बस रोजी–रोटी, घर गृहस्थी की आवश्यकता, पत्नी बच्चों की नित नयी नयी फरमाइशों में … Read more

क्या सच मे यह हम हैं?

पीएम, सीएम, सांसद, विधायक,पार्षद सबको गाली दे लीजिए लेकिन , यह जो 700- 800 का ऑक्सीमीटर 3000+ में बेच रहे यह हम हैं! जो ऑक्सीजन की कालाबाजारी कर रहे यह हम हैं! यह जो रेमडेसीविर को 20000+ प्लस में बेच रहे यह हम हैं! यह जो श्मशान की लकड़ियों में बेईमानी कर रहे यह हम … Read more

कितनी रकम?

*आज कोरोना संक्रमण से एक 93 साल का बूढ़ा व्यक्ति ठीक हुआ और जब वह अस्पताल से डिस्चार्ज होने लगा, तब उसे अस्पताल के स्टॉफ ने एक दिन के वेंटिलेटर, oxygen के इस्तेमाल करने का बिल 13,000 रुपये का थमा दिया जो किसी कारणवश (बाकी बिल से) छूट गया था।* *जिसे देखकर वह बूढ़ा व्यक्ति … Read more