खाशाबा दादासाहेब जाधव – एक गुमनाम हीरो

भारत को पहला ओलिंपिक पदक दिलाने वाले गुमनाम हीरो पहलवान “#खाशाबा_दादासाहेब_जाधव” ने 1952 में हुए हेलसिंकी गेम्स में कुश्ती में कांस्य पदक जीता था। इन्हें इनकी खेल प्रतिभा के कारण “पॉकेट डायनेमो” नाम से भी जाना जाता था।
देश को ओलिंपिक पदक दिलाने वाला ये हीरो गुमनाम बन कर ही रह गया। हेलसिंकी में हुए ओलिंपिक खेलों में वे क्वालिफाई तो कर चुके थे, लेकिन वहां पहुंचने के लिए उनके पास पैसे नहीं थे। जाधव ने हेलसिंकी जाने के लिए सरकार से मदद मांगी, लेकिन तत्कालीन मुंबई के चीफ मिनिस्टर मोरारजी देसाई ने उनसे पल्ला झाड़ लिया। उन्होंने अपने परिवार के साथ मिल कर इस यात्रा के लिए भीख मांग कर राशि जुटाई। राज्य सरकार ने उनके लगातार आग्रह के बाद उन्हें 4000 रुपए की छोटी सी राशि दे दी।
जाधव राजाराम कॉलेज में पढ़ा करते थे। उस कॉलेज के प्रिंसिपल खरडिकर ने खाशाबा की लगन देख कर उन्हें 7000 रुपए की आर्थिक मदद दे दी। अब उन्हें हेलसिंकी जाने का रास्ता मिल गया था। जाधव ने हेलसिंकी में कांस्य पदक जीत कर अपना जलवा दिखाया। 45 वर्षों तक पुरे भारत में सिर्फ यही ओलंपिक मैडल विजेता रहे, जब तक कि 1996 में “लेयेंडर पेस” ने भारत के लिए दूसरा ओलंपिक मैडल नहीं जीता था।
सन्दीप सिंह

Reference – Facebook

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