“वो” देख रहा है
एक दिन सुबह सुबह दरवाजे की घंटी बजी । दरवाजा खोला तो देखा एक आकर्षक कद- काठी का व्यक्ति चेहरे पे प्यारी सी मुस्कान लिए खड़ा है ।* *मैंने कहा, “जी कहिए..”* *तो उसने कहा,* *अच्छा जी, आप तो रोज़ हमारी ही गुहार लगाते थे,* *मैंने कहा* *”माफ कीजिये, भाई साहब ! मैंने पहचाना नहीं, … Read more